KNEWS DESK- संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर लगातार दूसरे दिन भी तीखी बहस जारी रही। इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार की मंशा और परिसीमन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
लोकसभा में चर्चा के दौरान थरूर ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए उन राज्यों को राजनीतिक लाभ दिया जा सकता है, जो जनसंख्या नियंत्रण में पीछे रहे हैं। उनके मुताबिक, यह एक तरह से उन राज्यों को “इनाम” देने जैसा होगा।
थरूर ने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए नोटबंदी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे नोटबंदी के समय बिना पर्याप्त तैयारी के फैसला लिया गया था, वैसे ही परिसीमन को लेकर भी जल्दबाजी दिखाई जा रही है। उन्होंने इसे “राजनीतिक विमुद्रीकरण” तक करार दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को गंभीरता और विस्तृत चर्चा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। थरूर के अनुसार, इस प्रक्रिया में तीन बड़े संतुलन के मुद्दे सामने आते हैं—छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन, जनसंख्या नियंत्रण में सफल और असफल राज्यों के बीच अंतर, और आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों व केंद्र पर निर्भर राज्यों के बीच संतुलन।
इसके अलावा, थरूर ने गृह मंत्री अमित शाह के 50 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े बयान को भी “जोखिम भरा” बताया और कहा कि यह कोई विधायी वादा नहीं है। उन्होंने लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि इससे संसद के कामकाज पर असर पड़ सकता है और दोनों सदनों के बीच असंतुलन पैदा होगा।
वहीं दूसरी ओर, डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब संसद में इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा चल रही थी, उसी दौरान इसे नोटिफाई कर देना यह दर्शाता है कि सरकार संसद की प्रक्रिया का सम्मान नहीं कर रही है।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर गंभीर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।