नोएडा की डीएम मेधा रूपम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए यह रकम डीएम की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया गया था।
Knews Desk– मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच कर रही है। यह मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और स्टूडेंट-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है। आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा के मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया गया था और वह करीब पांच महीने हिरासत में रही थीं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत को गैर-कानूनी करार दिया था। अदालत को NSA के तहत हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त और ठोस सामग्री नहीं मिली। इसके बाद हाई कोर्ट ने हिरासत का आदेश रद्द करते हुए नोएडा की डीएम को अपनी सैलरी से आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसी आदेश को मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को पूरी तरह गैर-जरूरी बताया। उन्होंने दलील दी कि आकृति चौधरी फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों को इकट्ठा करती थीं और उन्हें विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाती थीं। उनके मुताबिक, इसके बाद मामला नोएडा तक पहुंचा, जहां सड़कें जाम करने, फैक्ट्रियों में आगजनी और पत्थरबाजी जैसी घटनाएं हुईं। रोहतगी ने कहा कि आकृति चौधरी को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और NSA के तहत हिरासत की प्रक्रिया SHO स्तर से शुरू होकर आगे बढ़ती है, जिसके बाद डीएम आदेश जारी करते हैं।
रोहतगी ने अदालत को बताया कि NSA के तहत हिरासत के आदेश को एक जज की अध्यक्षता वाली सलाहकार समिति से मंजूरी मिलनी होती है और इसके बाद राज्य तथा केंद्र सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की जाती है। उन्होंने कहा कि डीएम इस पूरी प्रक्रिया की एक कड़ी मात्र हैं। उनके अनुसार, हाई कोर्ट ने मामले का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आकृति चौधरी 11 तारीख की शाम से अपने व्हाट्सऐप संदेशों का जवाब नहीं दे रही थीं, इसलिए उन्हें उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि हिरासत का आदेश करीब एक महीने बाद जारी हुआ था। रोहतगी ने इसे कानून की गलत व्याख्या बताते हुए कहा कि हाई कोर्ट को इस पहलू का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना चाहिए था।
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई की बेंच को बताया था कि नोएडा की डीएम हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी।
पूरा मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़ा है। आकृति चौधरी पर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर NSA के तहत हिरासत में लिया गया। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचने पर अदालत ने हिरासत के आधार और प्रशासन की ओर से पेश सामग्री की जांच की और पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर हिरासत रद्द कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने मेधा रूपम की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।