डिजिटल डेस्क- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत पर फिलहाल रोक लगा दी है और उन्हें राहत के लिए असम की निचली अदालत का रुख करने को कहा है। इस फैसले के बाद खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दरअसल, यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है। इस केस में खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री परिवार को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी दी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस स्तर पर सुप्रीम कोर्ट से राहत देना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को पहले संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत यानी असम की अदालत में ही अपनी अग्रिम जमानत की अर्जी देनी चाहिए।
असम सीएम की पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की अंतरिम अग्रिम जमानत दी थी। खेड़ा ने सात अप्रैल को हाईकोर्ट का रुख करते हुए गिरफ्तारी की आशंका जताई थी और ट्रांजिट जमानत की मांग की थी। उन्होंने अपने आवेदन में हैदराबाद का पता दर्शाया था, जिसके आधार पर उन्हें अस्थायी राहत मिली थी। मामले की जड़ 5 अप्रैल को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी है, जिसमें पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में संपत्तियां हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि इन संपत्तियों का खुलासा चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। यह बयान उस समय आया था जब असम में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही थीं।
पवन खेड़ा के आरोपों का सरमा दंपति ने किया खारिज
हालांकि, सरमा दंपति ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें झूठा और मनगढ़ंत बताया। इसके बाद गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 175 (चुनाव से जुड़ा झूठा बयान), 35 और 318 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद पवन खेड़ा को असम की अदालत में ही अपनी अग्रिम जमानत के लिए अपील करनी होगी।