KNEWS DESK- उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनावी मैदान में इस बार युवा वोटर्स को साधने पर खास फोकस नजर आ रहा है। बेरोजगारी, पलायन और रोजगार के सीमित अवसर लंबे समय से राज्य की राजनीति के अहम मुद्दे रहे हैं। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं।
रोजगार और स्वरोजगार के जरिए युवाओं तक पहुंच
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार, स्टार्टअप और कौशल विकास से जोड़ने वाली योजनाओं पर जोर दे रही है। सरकार का संदेश है कि उत्तराखंड का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला भी बने। सरकार की ओर से रोजगार मेलों, स्टार्टअप नीति, कौशल विकास और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने जैसी पहलों को युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। साथ ही भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के लिए नकल विरोधी कानून को भी अहम कदम बताया जा रहा है।
11 हजार छात्रों को मिलेगी मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग
इसी कड़ी में राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना शुरू की है। योजना के तहत राजकीय और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके पहले चरण में करीब 11 हजार छात्रों को योजना से जोड़ने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि पर्वतीय और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के सामने आर्थिक और संसाधनों की कमी उनके सपनों में बाधा नहीं बनेगी।
ढाई लाख युवाओं से संवाद की तैयारी
सरकार की ओर से ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों से वैचारिक मंथन करने और उनके सुझाव लेने की बात भी कही जा रही है। इसके साथ ही युवाओं से जुड़े मुद्दों के लिए अलग युवा आयोग के गठन की तैयारी भी चर्चा में है। सरकार इन कदमों के जरिए युवाओं की समस्याओं को समझने और उनके सुझावों को नीतियों में शामिल करने का संदेश दे रही है। हालांकि, विपक्ष इन दावों को चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहा है।
70 विधानसभा सीटों पर बीजेपी का युवा संवाद
बीजेपी संगठन ने भी युवा वोट बैंक को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके जरिए युवाओं से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं और सुझाव जानने की कोशिश की जाएगी।
पार्टी का लक्ष्य युवाओं को सिर्फ सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी अभियान और संगठन से जोड़ने का भी है। युवा संवाद के जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर युवाओं के मुद्दों को समझने और उन्हें राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनाने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस भी युवाओं को साधने में जुटी
वहीं कांग्रेस भी युवा वोटर्स के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी बेरोजगारी, पेपर लीक और पलायन जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार युवाओं की समस्याओं का स्थायी समाधान करने में नाकाम रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी से जुड़े ‘छात्रों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए भी छात्र और युवा मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही है। इससे चुनाव से पहले युवा वोट बैंक को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
युवा वोटर्स पर टिकी सियासी नजर
उत्तराखंड की राजनीति में बेरोजगारी और पलायन लंबे समय से बड़े चुनावी मुद्दे रहे हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक तरफ धामी सरकार रोजगार, स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास और मुफ्त कोचिंग जैसी योजनाओं के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं ढाई लाख युवाओं से संवाद और युवा आयोग की तैयारी को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दूसरी तरफ बीजेपी 70 विधानसभा सीटों पर युवा संवाद के जरिए संगठन और युवाओं के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने की तैयारी में है। कांग्रेस बेरोजगारी, पेपर लीक और पलायन के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले युवा वोट बैंक को लेकर सियासी मुकाबला तेज होता दिखाई दे रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि रोजगार और सरकारी योजनाओं का मुद्दा युवाओं को कितना प्रभावित करता है और विपक्ष के बेरोजगारी-पलायन के सवालों पर युवा मतदाता किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। चुनावी नतीजे बताएंगे कि उत्तराखंड का युवा किसके वादों और दावों पर भरोसा करता है।