Knews Desk– अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित भव्य योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह वही रेड रोड है, जिसने ब्रिटिश शासन, द्वितीय विश्व युद्ध और स्वतंत्र भारत के कई ऐतिहासिक पलों को करीब से देखा है। कभी जिस सड़क का इस्तेमाल लड़ाकू विमानों के आपातकालीन रनवे के रूप में किया जाता था, आज वही भारत की सांस्कृतिक विरासत और योग की वैश्विक पहचान का केंद्र बन गई है।

कोलकाता के मध्य में स्थित रेड रोड, जिसे आधिकारिक तौर पर इंदिरा गांधी सरणी कहा जाता है, मैदान क्षेत्र से होकर गुजरती है। फोर्ट विलियम के निकट स्थित होने के कारण इसका सामरिक महत्व हमेशा से बेहद खास रहा है। इस सड़क का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में सैन्य परेड और अभ्यास के लिए कराया गया था। इसकी चौड़ाई और सीधी बनावट इसे विशेष बनाती है।
रेड रोड का नाम इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई लाल रंग की बजरी और कंकड़ों के कारण पड़ा। हालांकि समय के साथ इस पर डामर बिछा दिया गया, लेकिन इसका ऐतिहासिक नाम आज भी लोगों की जुबान पर कायम है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस सड़क की भूमिका बेहद अहम रही। जापानी हमलों के खतरे को देखते हुए ब्रिटिश प्रशासन ने इसे आपातकालीन हवाई पट्टी में बदल दिया था। सड़क इतनी चौड़ी और लंबी थी कि यहां लड़ाकू विमान आसानी से उतर सकते थे। यही वजह है कि आज भी इसके आसपास ऊंची इमारतों का निर्माण सीमित है और यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्वतंत्रता के बाद रेड रोड पश्चिम बंगाल के प्रमुख सरकारी और सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र बन गया। यहां हर वर्ष गणतंत्र दिवस परेड, स्वतंत्रता दिवस समारोह और दुर्गा पूजा कार्निवल जैसे भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके दोनों ओर फैली हरियाली और मैदान क्षेत्र इसे कोलकाता की सबसे खूबसूरत सड़कों में शामिल करते हैं।
आज जब प्रधानमंत्री मोदी ने इसी ऐतिहासिक सड़क पर हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया, तो यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत की उस विरासत का प्रतीक बन गया, जहां इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता एक साथ दिखाई देते हैं। कभी युद्ध की तैयारी का केंद्र रही रेड रोड आज शांति, स्वास्थ्य और योग के संदेश की वाहक बन चुकी है।