यूपी में नई तबादला नीति 2026-27 को मंजूरी, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 9 लाख कर्मचारियों पर होगा असर

डिजिटल डेस्क- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश की नई स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। यह नीति प्रदेश के लगभग 9 लाख से अधिक राज्य कर्मचारियों के भविष्य और कार्यक्षेत्र को प्रभावित करेगी। पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता को केंद्र में रखते हुए बनाई गई इस नीति में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कई कड़े प्रावधान किए गए हैं, जिसमें समूह ‘क’ से लेकर ‘घ’ तक के कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।

गृह जिलों और मंडलों में तैनाती पर सख्त पाबंदी

नई नीति के अनुसार, प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, जिन अधिकारियों के पद केवल मंडल स्तर के हैं, उन्हें उनके गृह मंडल में भी पोस्टिंग नहीं मिलेगी। समूह ‘ख’ के अधिकारियों पर भी गृह मंडल में तैनाती का प्रतिबंध लगाया गया है, हालांकि यह नियम केवल जिला स्तरीय विभागों और कार्यालयों पर ही प्रभावी होगा। वहीं, समूह ‘ग’ के कार्मिकों के लिए पटल (Seat) और क्षेत्र परिवर्तन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने के कारण होने वाले नेक्सस को तोड़ा जा सके।

31 मई तक पूरे होंगे तबादले, मंत्रियों की होगी अहम भूमिका

कैबिनेट ने तबादलों के लिए समयसीमा भी निर्धारित कर दी है। विभागाध्यक्ष अपने संबंधित मंत्रियों की सहमति से 31 मई तक कार्मिकों का स्थानांतरण कर सकेंगे। इसके लिए कट-ऑफ अवधि 31 मार्च तय की गई है। यानी 31 मार्च तक जिन कर्मचारियों ने एक जिले में 3 साल या एक मंडल में 7 साल पूरे कर लिए हैं, उनका स्थानांतरण अनिवार्य होगा। यदि किसी विभाग का जिले में दूसरा कार्यालय नहीं है, तो कार्मिक का पटल परिवर्तन 13 मई 2022 के शासनादेश के आधार पर किया जाएगा।

रिटायरमेंट के करीब और विशेष परिस्थितियों में राहत

योगी सरकार की नई तबादला नीति में प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का भी पूरा ख्याल रखा गया है। नीति के तहत उन कार्मिकों को बड़ी राहत दी गई है जिनकी सेवानिवृत्ति में केवल 2 वर्ष का समय शेष है; ऐसे में समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों को उनके गृह जिले में और समूह ‘क’ व ‘ख’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले को छोड़कर पसंदीदा जिले में तैनाती देने पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, ‘दंपत्ति नीति’ को भी विशेष महत्व दिया गया है, जिसके तहत यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, तो उनके स्थानांतरण के आवेदनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उन्हें यथासंभव एक ही जिले या स्थान पर तैनात करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, सीधी भर्ती या पदोन्नति के माध्यम से आने वाले नवनियुक्त कार्मिकों के लिए भी लचीला रुख अपनाते हुए उनकी तैनाती प्रशासनिक आवश्यकताओं और उनके व्यक्तिगत विकल्पों के उचित संतुलन के आधार पर करने का प्रावधान किया गया है।

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