KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हलिशहर में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को गुस्साई भीड़ ने बीच रास्ते में रोक लिया। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी एक मृत तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता के परिवार से मिलने के लिए वहां जा रही थीं। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जमा हो गए और काफिले को रोककर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के वाहन को चारों तरफ से घेर लिया और उस पर कीचड़, पानी की बोतलें, जूते और चप्पलें फेंकीं।
हलिशहर में काफिला रोके जाने से मचा हंगामा
जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी का काफिला उत्तर 24 परगना के हलिशहर इलाके से गुजर रहा था। उनका कार्यक्रम एक मृत TMC कार्यकर्ता के घर जाने का था। इसी दौरान रास्ते में मौजूद भीड़ ने काफिले को रोक दिया। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई और लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के वाहन को चारों ओर से घेर लिया। इसके बाद वाहन पर कीचड़ और पानी की बोतलें फेंकी गईं। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने जूते और चप्पल भी वाहन की ओर फेंके। इस दौरान ममता बनर्जी के खिलाफ तीखी नारेबाजी की गई और प्रदर्शनकारियों ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए आपत्तिजनक नारे लगाए।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा
काफिले को घेरकर प्रदर्शन और नारेबाजी तेज होने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे के बीच ममता बनर्जी को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस की मौजूदगी में ममता बनर्जी का काफिला इलाके से निकल गया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर कैसे रोक लिया।
मृत TMC कार्यकर्ता की मौत को लेकर परिवार के आरोप
ममता बनर्जी के काफिले के विरोध की वजह एक TMC कार्यकर्ता की मौत से जुड़ी बताई जा रही है। मृतक के परिवार की ओर से स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिवार का दावा है कि पुलिस हिरासत में कार्यकर्ता के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इन्हीं आरोपों को लेकर इलाके में लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। ममता बनर्जी इसी मृत TMC कार्यकर्ता के परिवार से मिलने के लिए पहुंच रही थीं। हालांकि, उनके पहुंचने से पहले ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया और उनका काफिला भीड़ के बीच फंस गया।
मृतक के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
ममता बनर्जी के खिलाफ हुई नारेबाजी
काफिले को रोके जाने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ ने उन्हें निशाना बनाते हुए उन्हें चोर और ‘डकैतों की रानी’ जैसे ताने दिए। विरोध कर रहे लोगों का गुस्सा इस कदर बढ़ गया कि उन्होंने काफिले की गाड़ियों की ओर कीचड़, पानी की बोतलें, जूते और चप्पलें फेंकनी शुरू कर दीं।
घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ सकता है। पश्चिम बंगाल में पहले भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं से जुड़े विवादों और हिंसा के मामलों को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले को इस तरह बीच रास्ते में रोककर प्रदर्शन किए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से पहले संभाल लिया और ममता बनर्जी को सुरक्षित वहां से निकाल लिया। घटना के बाद प्रशासन के सामने यह चुनौती होगी कि मृत TMC कार्यकर्ता की मौत को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कैसे की जाती है और इलाके में तनाव को किस तरह नियंत्रित रखा जाता है।
फिलहाल घटना को लेकर शुरुआती जानकारी ही सामने आई है और मामले में आगे और अपडेट आने की संभावना है। मृत TMC कार्यकर्ता की मौत, पुलिस पर लगे आरोपों और ममता बनर्जी के काफिले पर हुए हमले को लेकर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। हलिशहर की इस घटना ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल को एक बार फिर गरमा दिया है। अब देखना होगा कि पुलिस इस पूरे घटनाक्रम में क्या कार्रवाई करती है और मृतक के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच में क्या सामने आता है।