NALSAR में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने पर छात्रों का विरोध, 450+ ने जताई आपत्ति

KNEWS DESK- तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी में आगामी दीक्षांत समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक बड़े समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

छात्रों का कहना है कि हाल के कुछ मामलों में CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों और रुख को लेकर उनके मन में गंभीर चिंताएं हैं। छात्रों ने अपने पत्र में इसे शैक्षणिक स्वतंत्रता, संवैधानिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए विश्वविद्यालय से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है।

450 से ज्यादा छात्रों ने जताई आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 बैच के छात्रों के एक समूह ने NALSAR के कुलपति, कुलसचिव, फैकल्टी सदस्यों और विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजा है। छात्रों का दावा है कि 450 से अधिक विद्यार्थियों ने CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग का समर्थन किया है।

छात्रों ने कहा कि दीक्षांत समारोह उनके लिए सिर्फ डिग्री हासिल करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के अध्ययन और मेहनत का महत्वपूर्ण पड़ाव है। ऐसे में वे चाहते हैं कि समारोह में शामिल होने वाले मुख्य अतिथि का चयन विश्वविद्यालय के मूल्यों और छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

NEET प्रदर्शन को लेकर CJI की टिप्पणी बनी वजह

छात्रों की नाराजगी की एक बड़ी वजह हाल में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर हुई सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 22 जुलाई को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लेने से इनकार किया था।

इस दौरान CJI की कुछ टिप्पणियां चर्चा में आई थीं। छात्रों का आरोप है कि इन टिप्पणियों से प्रदर्शन कर रहे युवाओं और उनके मुद्दों के प्रति असंवेदनशीलता का संदेश गया। छात्रों ने इसी संदर्भ को अपने विरोध का आधार बनाया है।

‘हमारे लिए यह भावनात्मक रूप से सही नहीं’

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजे पत्र में कहा कि CJI की हालिया टिप्पणियों से उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि युवाओं और प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। छात्रों के पत्र में CJI की कुछ टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे व्यक्ति को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित करना और फिर उन्हीं के हाथों से डिग्री प्राप्त करना उनके लिए उचित नहीं लगता।

छात्रों ने यह भी कहा कि NALSAR जैसे कानून विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए संवैधानिक अधिकार, जवाबदेही और न्याय के सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए मुख्य अतिथि के चयन में भी इन मूल्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

दीक्षांत समारोह की तारीख अभी तय नहीं

इस पूरे विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि NALSAR की ओर से अभी तक दीक्षांत समारोह की तारीख और मुख्य अतिथि को लेकर औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने इसी वजह से प्रशासन से अंतिम निर्णय लेने से पहले उनकी आपत्तियों पर विचार करने की मांग की है।

छात्रों ने विश्वविद्यालय से जल्द जवाब देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे विरोध का रास्ता अपना सकते हैं। छात्रों की ओर से प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिए जाने और इसके बाद प्रदर्शन करने की संभावना भी जताई गई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल NALSAR विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों की मांग पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन इस मामले पर फिलहाल स्थिति पर नजर रख रहा है।

छात्रों का विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब दीक्षांत समारोह की तैयारियों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर है। क्या NALSAR छात्रों की मांग पर विचार करेगा या CJI सूर्यकांत को ही मुख्य अतिथि बनाए रखने के फैसले पर आगे बढ़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

इस विवाद ने एक बार फिर विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन, छात्रों की भावनाओं और संस्थानों के संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।

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