ममता बनर्जी का बागियों पर महा-एक्शन, चेयरमैन अरूप रॉय और फिरहाद हकीम समेत 9 बड़े नेता पार्टी से निष्कासित

डिजिटल डेस्क- ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। कोलकाता के पूर्व मेयर और पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम सहित आठ अन्य बागी नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। निष्कासित किए गए नेताओं की सूची में जावेद अहमद खान, अरूप रॉय, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन, अरूप बिस्वास और स्नेहाशीष चक्रवर्ती जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने यह फैसला बागियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के कुछ ही घंटों बाद लिया।

बगावत और नया नेतृत्व ढांचा

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे ने टीएमसी के लिए एक नए लीडरशिप स्ट्रक्चर (नेतृत्व ढांचे) की घोषणा कर दी। इस नए ढांचे में ममता बनर्जी को पार्टी के चेयरपर्सन पद से “हटाकर” उनके स्थान पर अनुभवी विधायक अरूप रॉय को सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष चुन लिया गया। इसके साथ ही बागियों ने 30 सदस्यों वाली एक नई नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन किया और कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री उनकी “मेंटर” की भूमिका में रहें। इस कमेटी में फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास को वाइस-चेयरपर्सन बनाया गया था।

ममता बनर्जी का तीखा पलटवार

अपने ही पद और पार्टी पर आए इस संकट को देखते हुए ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया और 24 घंटे के भीतर ही पूरी कार्रवाई को अंजाम दे दिया। 1998 में कांग्रेस छोड़ने के बाद तृणमूल की स्थापना करने वाली और तब से इसकी कमान संभालने वाली ममता बनर्जी ने इस तख्तापलट की कोशिश को पूरी तरह खारिज कर दिया। बागी नेताओं का दावा है कि टीएमसी के 80 में से कम से कम 60 विधायकों का उन्हें समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद पहले ही अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो चुके हैं। ममता बनर्जी द्वारा की गई इस त्वरित निष्कासन कार्रवाई ने अब पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के भीतर की जंग को बेहद दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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