KNEWS DESK- सावन का पवित्र महीना भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है। इस महीने में सोमवार को भगवान भोलेनाथ की पूजा और व्रत का विधान है, जबकि मंगलवार का दिन मां पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप को समर्पित माना गया है। सावन के प्रत्येक मंगलवार को महिलाएं मंगला गौरी व्रत रखकर सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत में माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत में माता गौरी को सुहाग की सामग्री और विशेष भोग अर्पित करने का भी महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत पर सुहागिन महिलाओं को क्या करना चाहिए और सावन में इस बार यह व्रत किन-किन तारीखों पर रखा जाएगा।
मंगला गौरी व्रत पर माता को चढ़ाएं सुहाग सामग्री
मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को माता पार्वती के सामने सुहाग की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। धार्मिक परंपराओं में 16 की संख्या का विशेष महत्व माना गया है। इसलिए माता गौरी को 16 श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। इनमें सिंदूर, कुमकुम, चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, बिछिया, साड़ी और अन्य सुहाग सामग्री शामिल की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक सुहाग सामग्री चढ़ाने से माता गौरी प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।
16 की संख्या में अर्पित करें भोग
मंगला गौरी व्रत की पूजा में माता को भोग अर्पित करने की भी विशेष परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता को 16 पूरी, 16 लड्डू या 16 फल अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा 16 पान और सुपारी चढ़ाने का भी विधान बताया गया है। पूजा के दौरान माता पार्वती का ध्यान करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की प्रार्थना करनी चाहिए।
पूजा के बाद जरूर पढ़ें मंगला गौरी व्रत कथा
मंगला गौरी की विधिवत पूजा के बाद व्रत कथा का पाठ करना महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में व्रत कथा को पूजा का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इसलिए पूजा संपन्न होने के बाद मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ें या श्रद्धापूर्वक सुनें। कथा के बाद माता पार्वती से पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना करें।
सुहागिन महिला को भेंट करें श्रृंगार सामग्री
पूजा में माता गौरी को अर्पित की गई सुहाग सामग्री को बाद में किसी सुहागिन महिला को भेंट करना शुभ माना जाता है। महिलाएं चाहें तो यह सामग्री अपनी सास को देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं। इसके अलावा किसी जरूरतमंद विवाहित महिला को भी सुहाग सामग्री, वस्त्र या मिठाई दान की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से व्रत का पुण्य फल बढ़ता है।
क्यों खास है मंगला गौरी व्रत?
मंगला गौरी व्रत मुख्य रूप से वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य की कामना से जुड़ा माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण माता पार्वती को सुखी दांपत्य जीवन और सौभाग्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि सावन के मंगलवार को मंगला गौरी की उपासना करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
Mangla Gauri Vrat 2026 Dates: सावन में कब-कब है मंगला गौरी व्रत?
साल 2026 में सावन के दौरान चार मंगलवार पड़ रहे हैं। ऐसे में चार मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे।
पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026, मंगलवार
दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026, मंगलवार
तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026, मंगलवार
चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026, मंगलवार
इस तरह सावन के चारों मंगलवार माता मंगला गौरी की आराधना के लिए विशेष माने जाएंगे। सुहागिन महिलाएं अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार व्रत रखकर माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं।