ADR की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, एक साल में क्षेत्रीय पार्टियों को मिलने वाले चंदे में करीब 198% की बढ़ोतरी; DMK और TMC समेत 8 दलों की कमाई कई राष्ट्रीय पार्टियों से ज्यादा
Knews Desk- देश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों का आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये से अधिक के घोषित चंदे के तौर पर कुल 1,051.56 करोड़ रुपये मिले। यह रकम 2023-24 में मिले 347.69 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 198% अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान क्षेत्रीय दलों को मिलने वाले चंदे की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ। 2023-24 में जहां 2,861 दान दर्ज किए गए थे, वहीं 2024-25 में इनकी संख्या बढ़कर 5,297 हो गई। यानी दान की संख्या में करीब 85% की वृद्धि हुई।
ADR के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को अलग रखने पर आठ क्षेत्रीय राजनीतिक दल ऐसे हैं, जिन्हें 2024-25 में कई राष्ट्रीय दलों से ज्यादा चंदा मिला। इनमें DMK, तृणमूल कांग्रेस (AITC), YSR कांग्रेस, TDP और AIADMK प्रमुख हैं। सिर्फ इन पांच दलों को मिलाकर 840.12 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो सभी क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का लगभग 79.9% है।
कॉर्पोरेट और इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया बड़ा पैसा
क्षेत्रीय पार्टियों को मिले चंदे में कारोबारी और कॉर्पोरेट जगत की हिस्सेदारी काफी बड़ी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का करीब 61.33%, यानी लगभग 644.93 करोड़ रुपये, कॉर्पोरेट और व्यापारिक घरानों से आया। इसमें प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट सबसे बड़े दानदाताओं में शामिल रहा। दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर इस ट्रस्ट ने क्षेत्रीय दलों को करीब 434 करोड़ रुपये दिए। इसमें अकेले 2024-25 में 253.50 करोड़ रुपये शामिल हैं।
वहीं टाइगर एसोसिएट्स ने भी 2024-25 में पांच किस्तों में कुल 160 करोड़ रुपये का योगदान दिया। क्षेत्रीय दलों को सबसे ज्यादा चंदा जिन राज्यों से मिला, उनमें दिल्ली 433.77 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल 172.93 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र 158.80 करोड़ रुपये के साथ प्रमुख रहे।
अज्ञात दान में 4,470% की बढ़ोतरी
चंदे में बढ़ोतरी के साथ राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। ADR के मुताबिक, अज्ञात स्रोतों से मिलने वाले चंदे में एक साल के भीतर असाधारण बढ़ोतरी हुई।
2023-24 में अज्ञात दानदाताओं से क्षेत्रीय दलों को 6.62 करोड़ रुपये मिले थे। 2024-25 में यह राशि बढ़कर 302.67 करोड़ रुपये हो गई। यानी इसमें करीब 4,470% का उछाल आया।
नकद चंदे में भी इसी तरह की वृद्धि दर्ज की गई। 2023-24 में क्षेत्रीय दलों को करीब 6.54 करोड़ रुपये नकद मिले थे, जो 2024-25 में बढ़कर 301.44 करोड़ रुपये हो गए।
DMK को सबसे ज्यादा चंदा, लेकिन बड़ी रकम का स्रोत अज्ञात
रिपोर्ट में तमिलनाडु की DMK का मामला खास तौर पर सामने आया है। पार्टी ने 2024-25 में करीब 365.78 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया, जो क्षेत्रीय दलों में सबसे ज्यादा है।
हालांकि, इसमें से करीब 300.64 करोड़ रुपये ऐसे दान के रूप में दर्ज किए गए, जिनमें दानकर्ताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि 20 हजार रुपये से कम के नकद चंदे के रूप में दिखाई गई है।
इसके अलावा बिना PAN विवरण वाले चंदे में भी बड़ा इजाफा हुआ। ऐसी राशि 2023-24 में 7.68 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 329.58 करोड़ रुपये हो गई। यह कुल चंदे का करीब 31.3% है।
TMC के चंदे पर भी सवाल
तृणमूल कांग्रेस के मामले में ADR ने बताया कि पार्टी को 2024-25 में करीब 184.96 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें लगभग 184.08 करोड़ रुपये चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए प्राप्त हुए, लेकिन कई दानदाताओं की जरूरी जानकारियां, जैसे पता या PAN विवरण, पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं।
इलेक्ट्रोरल बॉन्ड व्यवस्था खत्म होने से पहले भी क्षेत्रीय दलों को बड़ी रकम मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, 15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना रद्द किए जाने से पहले TMC ने बॉन्ड के जरिए 612.42 करोड़ रुपये, जबकि BRS ने 495.52 करोड़ रुपये जुटाए थे।
67 में से 33 क्षेत्रीय दलों ने नहीं दी चंदे की रिपोर्ट
ADR ने राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता पर एक और गंभीर सवाल उठाया है। रिपोर्ट तैयार किए जाने तक देश की 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों में से 33 दलों ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपनी चंदे की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई थी। इनमें जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC), असम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, टिपरा मोथा और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक समेत कई दल शामिल हैं।
कुल मिलाकर ADR की रिपोर्ट क्षेत्रीय दलों की बढ़ती आर्थिक ताकत के साथ-साथ राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को लेकर भी कई सवाल खड़े करती है। एक तरफ पार्टियों को मिलने वाली रकम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ अज्ञात दान, नकद रकम और अधूरी दानदाता जानकारी का बढ़ना राजनीतिक फंडिंग व्यवस्था पर निगरानी की जरूरत को और मजबूत करता है।