कच्चे घर, आर्थिक तंगी और बेटियों के भविष्य की चिंता से जूझ रही रिंकी मिश्रा की जिंदगी महज दो महीने में बदल गई। सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के साथ उसे रोजगार मिला और अब उसका पक्का घर भी बन रहा है।
Knews Desk- कानपुर के बिरसिंहपुर की रहने वाली रिंकी मिश्रा की कहानी प्रशासनिक मदद से बदली एक ऐसी तस्वीर है, जिसने पूरे इलाके का ध्यान खींचा है। करीब दो महीने पहले रिंकी अपनी फरियाद लेकर 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील पहुंची थी। उस वक्त उसके पास कोई लिखित प्रार्थना पत्र तक नहीं था, लेकिन उसे भरोसा था कि जिलाधिकारी उसकी परेशानी जरूर सुनेंगे।
रिंकी के पति की करीब 10 साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी अकेले उसके कंधों पर आ गई। उसकी बड़ी बेटी दिव्यांग है, जबकि छोटी बेटी अदिति की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी रिंकी लगातार चिंतित रहती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उनके पास रहने के लिए पक्का मकान तक नहीं था।

18 जुलाई को रिंकी ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद डीएम के निर्देश पर घाटमपुर के एसडीएम अबिचल प्रताप सिंह उसी दिन रिंकी के घर पहुंचे और परिवार की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद पात्रता के आधार पर परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
करीब दो महीने बाद 19 सितंबर को घाटमपुर में एक बार फिर संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन हुआ। इस बार हालात पहले से बिल्कुल अलग थे। जिस महिला को अपनी समस्या बताने के लिए 18 किलोमीटर पैदल चलकर डीएम के पास जाना पड़ा था, उसी रिंकी का हाल जानने के लिए जिलाधिकारी खुद उसके घर पहुंच गए।
रिंकी के घर की तस्वीर भी अब बदल रही है। कच्चे मकान की जगह पक्का आशियाना तैयार हो रहा है। घर की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं और जल्द ही लिंटर डाले जाने की तैयारी है।
रिंकी के परिवार को अंत्योदय राशन कार्ड, गैस कनेक्शन, निराश्रित महिला पेंशन और आयुष्मान कार्ड का लाभ मिला है। वहीं दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड बनवाया गया है। दोनों बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से भी जोड़ा गया है।
रिंकी के लिए एक और बड़ी राहत रोजगार के रूप में मिली। उसे घर के पास स्थित प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के तौर पर काम मिल गया। इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिलने के साथ रिंकी के लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी खुला है।

वहीं रिंकी की छोटी बेटी अदिति ने आर्थिक परेशानियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। डीएम ने उसका पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में दाखिला कराया और उसकी फीस भी जमा कराई। कक्षा सात में पढ़ने वाली अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल किया है।
डीएम जब अदिति से मिलने उसके घर पहुंचे तो बच्ची ने अपने भविष्य का सपना भी साझा किया। अदिति ने कहा कि वह बड़ी होकर डीएम बनना चाहती है और उनकी तरह लोगों की मदद करना चाहती है।
एक तरफ रिंकी की जिंदगी में पक्के घर और रोजगार की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ उसकी बेटी अदिति की आंखों में बड़ा सपना है। करीब दो महीने पहले मदद की उम्मीद में 18 किलोमीटर पैदल चलकर डीएम के पास पहुंची रिंकी के घर अब खुद जिलाधिकारी पहुंचे। इस दौरान परिवार को मिली सरकारी योजनाओं और सुविधाओं ने उसकी जिंदगी को नई दिशा देने का काम किया है।