Knews Desk– मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने OBC के 27% आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने 50% आरक्षण सीमा का हवाला देते हुए कहा कि इसे पार करने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है। फैसले के बाद 13% पदों को अनारक्षित वर्ग से भरने और प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने 27 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 159 पेज के आदेश में कहा कि मामले में ऐसी कोई असाधारण या आपात स्थिति नहीं है, जिसके आधार पर आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को पार किया जा सके।
कोर्ट ने 2 सितंबर 2019 से 29 सितंबर 2022 तक 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर हुई भर्तियों को सुरक्षित रखने से संबंधित आदेश पर रोक बरकरार रखी। साथ ही 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित वर्ग से भरने का निर्देश दिया। राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा।
फैसले के बाद मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता ने कहा कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दस्तावेजों, सारणियों और सांख्यिकीय आंकड़ों का परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि सरकार हाई कोर्ट के विस्तृत आदेश का अध्ययन और समीक्षा कर रही है।
इस फैसले पर कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि उनकी पार्टी 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के लिए संघर्ष जारी रखेगी और फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर OBC वर्ग के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया।
वहीं, OBC महासभा ने भी फैसले पर निराशा जताई। संगठन की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य और याचिकाकर्ता लोकेंद्र गुर्जर ने कहा कि महासभा सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देगी और OBC वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष जेपी धनौपिया ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अदालत के सामने तथ्यों को प्रभावी ढंग से पेश करने में विफल रही, जिसके कारण OBC वर्ग 27 प्रतिशत आरक्षण के लाभ से वंचित हो गया।