LPG सिलेंडर फिर हुआ महंगा, 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में लगातार 7वीं बार बढ़ोतरी

KNEWS DESK- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन और एलपीजी आपूर्ति पर दबाव के बीच जून महीने की शुरुआत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में लगातार सातवीं बार इजाफा दर्ज किया गया है।

तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि की गई है। इसके बाद इसकी नई कीमत 3,113.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। वहीं कोलकाता में इस श्रेणी के सिलेंडर के दाम 53.50 रुपये बढ़कर 3,255.50 रुपये पर पहुंच गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में इस अवधि के दौरान 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत करीब 1,533 रुपये बढ़ चुकी है, जो लगभग 97 प्रतिशत की वृद्धि के बराबर है। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबों और छोटे कारोबारों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। वहीं कोलकाता में यह 939 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये प्रति सिलेंडर पर उपलब्ध है।

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी संशोधन मार्च महीने में किया गया था, जब प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद से कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

दूसरी ओर 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर, जिन्हें आमतौर पर ‘छोटू सिलेंडर’ कहा जाता है, की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। नई दरों के मुताबिक दिल्ली में इसकी कीमत 11 रुपये बढ़कर 821.50 रुपये हो गई है। संशोधित दरें 1 जून से प्रभावी हो चुकी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संकट और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहते हैं, तो आने वाले महीनों में ईंधन और एलपीजी कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कीमतों का स्थिर रहना एक बड़ी राहत माना जा रहा है।

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