डिजिटल डेस्क- दिल्ली की सियासत में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। एक ओर आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नए सरकारी बंगले में शिफ्ट हुए, तो दूसरी ओर पार्टी को बड़ा झटका लगा, जब उनके करीबी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने केजरीवाल को दिल्ली के वीवीआईपी इलाके लोधी एस्टेट में 95 नंबर पर टाइप-7 सरकारी बंगला आवंटित किया है। शुक्रवार को केजरीवाल अपने परिवार के साथ इस नए आवास में शिफ्ट हो गए। उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह आवंटन उनकी मौजूदा स्थिति और अदालत के निर्देशों के आधार पर किया गया है। केजरीवाल ने लिखा कि केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर उनकी स्थिति को देखते हुए और कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें यह बंगला दिया है। गौरतलब है कि इस बंगले का आवंटन पिछले साल अक्टूबर में ही कर दिया गया था, जिसके बाद से इसके शिफ्टिंग को लेकर चर्चाएं चल रही थीं।
सितंबर 2024 के बाद से सांसद अशोक मित्तल के सरकारी बंगले में रह रहे थे केजरीवाल
इससे पहले केजरीवाल मुख्यमंत्री रहते हुए सिविल लाइंस स्थित फ्लैग स्टाफ रोड के सरकारी आवास में रहते थे। सितंबर 2024 में पद छोड़ने के बाद वे AAP के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल को आवंटित सरकारी बंगले में रह रहे थे। दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन केजरीवाल नए बंगले में शिफ्ट हुए, उसी दिन पार्टी के भीतर बड़ा सियासी उलटफेर भी देखने को मिला। AAP के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने संविधान के प्रावधानों का पालन करते हुए राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्यों के साथ भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया है। इस बयान के बाद दिल्ली और पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
राघव को केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता है
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि राघव चड्ढा और अशोक मित्तल को केजरीवाल का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना संगठन के भीतर चल रही हलचलों की ओर इशारा करता है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दल AAP पर निशाना साध रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।