Knews Desk- जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों ने हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के एक दिन बाद आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। संयुक्त अभियान के तहत दो सक्रिय आतंकवादियों के घर ध्वस्त कर दिए गए। अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बीच इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकी आदिल अहमद ठोकर के नए बने मकान को गिरा दिया गया। इससे पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद उसके पुराने घर पर भी कार्रवाई की गई थी। वहीं, बिजबेहारा के हसनपोरा तवेल्ला निवासी हारून रशीद गनई के एक मंजिला मकान को भी बुलडोजर से ढहा दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हारून वर्ष 2018 से लश्कर-ए-तैयबा के लिए सक्रिय है।
यह कार्रवाई 22 जुलाई 2026 को हुए उस आतंकी हमले के बाद की गई, जिसमें अनंतनाग के लाल चौक पर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी पर आतंकियों ने गोलीबारी की थी। गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हमले की जिम्मेदारी यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन ने सोशल मीडिया पर ली। पुलिस का दावा है कि ULC, पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन है।
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी के कई इलाकों में व्यापक तलाशी और घेराबंदी अभियान शुरू किया। इस दौरान आतंकियों के नेटवर्क से जुड़े बड़ी संख्या में संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादियों और उनके सहयोगियों की संपत्तियों पर कार्रवाई आतंकवाद विरोधी रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य आतंकियों के स्थानीय नेटवर्क, आर्थिक मदद और लॉजिस्टिक सपोर्ट को कमजोर करना है, ताकि उन्हें किसी भी तरह का स्थानीय सहयोग न मिल सके।
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भी सुरक्षा बलों ने आतंकियों और उनके समर्थकों से जुड़ी कई संपत्तियों पर इसी तरह की कार्रवाई की थी। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे कदमों का मकसद आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करना और सक्रिय आतंकियों पर लगातार दबाव बनाए रखना है।