KNEWS DESK- भारत और रूस के बीच तेल कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी भारत रूस से अपने कुल कच्चे तेल का बेहद कम हिस्सा आयात करता था, लेकिन 2022 के बाद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। अब स्थिति कुछ हद तक बदलती नजर आ रही है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस की रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने के बाद वहां पेट्रोल-डीजल की कमी बढ़ी है। ऐसे में रूस को ईंधन के लिए भारत पर निर्भर होना पड़ रहा है।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर यानी CREA की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में रूस ने रिकॉर्ड 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। यह मात्रा पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना से ज्यादा और पूरे वर्ष 2025 के आयात की तुलना में करीब तीन गुना रही। रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत थी।
वाडिनार रिफाइनरी से भेजा गया पेट्रोल
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से रूस भेजा गया पूरा पेट्रोल गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी में तैयार हुआ था। इसे नायरा एनर्जी ने रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट को बेचा। रोसनेफ्ट की नायरा एनर्जी में 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
CREA के अनुसार, 2026 के पहले आठ महीनों में वाडिनार रिफाइनरी में इस्तेमाल किया गया पूरा कच्चा तेल रूस से आया। यानी रूस अपनी हिस्सेदारी वाली रिफाइनरी को कच्चा तेल भेजकर पेट्रोल तैयार करा रहा है और फिर उसी ईंधन को वापस आयात कर रहा है।
समुद्री रास्ते से रूस पहुंचा ईंधन
भारत से भेजे गए पेट्रोल को मिस्र के तट के पास एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद इसे रूस के बेलोये मोरे बंदरगाह पर उतारा गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया में शामिल सभी जहाज प्रतिबंधित टैंकर थे।
अगस्त में दक्षिण कोरिया ने रूस को 18 हजार टन तेल उत्पाद और मिस्र ने करीब 25 हजार टन डीजल भेजा। वहीं, यूक्रेनी हमलों के चलते रूस का समुद्री तेल उत्पाद निर्यात 21 प्रतिशत घट गया।