KNEWS DESK- देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड में छात्रों ने स्कूलों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। कहीं शिक्षकों की कमी के चलते स्कूल में तालाबंदी कर दी गई, तो कहीं खराब भोजन, दूषित पानी और गंदे शौचालयों को लेकर छात्र धरने पर बैठ गए।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में करीब 1800 छात्र-छात्राओं ने स्कूल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं हमीरपुर में बच्चों ने सड़क की बदहाली के खिलाफ हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च किया। झारखंड के गढ़वा में शिक्षक के तबादले को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन बाद में हिंसक हो गया और पुलिस पर पथराव तक की स्थिति बन गई।
जालोर में शिक्षकों की कमी पर स्कूल में तालाबंदी
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा स्थित पीएम श्री स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र, अभिभावक और ग्रामीण सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और धरने पर बैठ गए। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर तत्काल पांच शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था करने का फैसला लिया। साथ ही 10 दिनों के भीतर तीन और शिक्षकों की नियुक्ति का लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
स्कूल में कुल 25 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ सात कर्मचारी ही कार्यरत बताए गए। यानी 18 पद खाली हैं। इनमें प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं। करीब 340 विद्यार्थियों वाले स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संस्कृत जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
खटीमा में खराब खाना और पानी को लेकर छात्र नाराज
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित एकलव्य मॉडर्न आवासीय विद्यालय में भी छात्रों ने व्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोला। छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में धरना दिया।
छात्रों का आरोप था कि उन्हें लंबे समय से खराब गुणवत्ता का भोजन दिया जा रहा है। इसके अलावा पीने के पानी की गुणवत्ता और शौचालयों की सफाई को लेकर भी शिकायतें थीं। छात्रों ने स्कूल परिसर में नारेबाजी करते हुए व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की।
मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल की प्रधानाचार्य भारती यादव को पद से हटा दिया गया।
फतेहपुर में 1800 छात्रों ने किया प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में करीब 1800 छात्र-छात्राओं ने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की शिकायत थी कि स्कूल में पर्याप्त बिजली और पंखे नहीं हैं। कई जगह वायरिंग खराब है और पीने के साफ पानी की भी समस्या है।
छात्रों ने शौचालयों की खराब स्थिति, मिड-डे मील और पर्याप्त बेंच नहीं होने की समस्या भी उठाई। विद्यार्थियों का कहना था कि उन्होंने कई बार स्कूल प्रशासन से शिकायत की, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
मामले की जानकारी मिलने पर जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल का निरीक्षण किया और छात्रों की समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।
हमीरपुर में तिरंगा लेकर सड़क के लिए मार्च
हमीरपुर में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने चंदूपुर मार्ग की बदहाली के खिलाफ अनोखे तरीके से आवाज उठाई। बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च किया और कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक गांव तक पक्की सड़क नहीं बन पाई है। बरसात में कच्चे रास्ते पर पानी और कीचड़ भर जाने से आवागमन मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है। कई बार खराब रास्ते के कारण बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि आपात स्थिति में एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है।
गढ़वा में शिक्षक के तबादले पर भड़के छात्र
झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र में शिक्षक के तबादले को लेकर छात्रों का आंदोलन गंभीर रूप ले गया। प्लस टू उच्च विद्यालय में पदस्थापित लोकप्रिय शिक्षक मलय सिंह के तबादले के विरोध में छात्र लगातार तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे।
शुरुआत में आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन गुरुवार को स्थिति बिगड़ गई। छात्र सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कांडी प्रखंड प्रमुख पिंकू पांडेय छात्रों को समझाने पहुंचे। आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और प्रखंड प्रमुख ने एक छात्र को थप्पड़ मार दिया।
इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र आक्रोशित हो गए और प्रखंड प्रमुख की गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव की स्थिति भी सामने आई।
चार राज्यों की घटनाओं ने उठाए बड़े सवाल
राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और झारखंड में सामने आई इन घटनाओं के मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन इनके पीछे एक समान तस्वीर दिखाई देती है। छात्र अब स्कूलों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
कहीं शिक्षक नहीं हैं, कहीं बिजली, पंखे और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, तो कहीं खराब सड़क बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रही है। वहीं, शिक्षक के तबादले को लेकर भी छात्र सड़क पर उतरने को मजबूर हुए।
इन घटनाओं ने स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, साफ-सफाई, पेयजल, भोजन, आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन ने कुछ मामलों में तत्काल कार्रवाई की है, लेकिन इन घटनाओं से यह संदेश जरूर मिलता है कि स्कूलों से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ तो छात्रों और ग्रामीणों का असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।