Knews Desk- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और किसान प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक चली बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल रहने के बाद किसानों ने अपना धरना जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे हैं। किसानों ने बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर डेरा डाल रखा है। आंदोलन के दौरान किसानों ने रास्ते में पुलिस द्वारा लगाए गए तीन बैरिकेड पार किए, लेकिन पूरे प्रदर्शन में किसी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की घटना सामने नहीं आई। किसानों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
स्कूलों में अवकाश, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
किसानों के बड़े प्रदर्शन को देखते हुए भोपाल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर राजधानी के कई स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। वहीं पुलिस और प्रशासन ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्ट किए गए हैं, ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।
मूंग की सरकारी खरीद सबसे बड़ा मुद्दा
किसानों के आंदोलन का मुख्य मुद्दा ग्रीष्मकालीन मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद है। किसानों का कहना है कि सरकार सीमित मात्रा में खरीद कर रही है, जिसके कारण बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज खुले बाजार में समर्थन मूल्य से कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदनी चाहिए। साथ ही खरीद प्रक्रिया में हो रही देरी और भुगतान में विलंब को भी तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
केंद्र से खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग
इस बीच मध्य प्रदेश सरकार ने भी केंद्र सरकार से मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने 14 मई और 3 जुलाई को केंद्र को पत्र भेजकर 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने की अनुमति मांगी थी, लेकिन केंद्र की ओर से फिलहाल केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन की खरीद का लक्ष्य स्वीकृत किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा 14.30 लाख हेक्टेयर रहा है। औसत उत्पादकता 1410 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जिससे कुल उत्पादन लगभग 20.16 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है। सरकार के अनुसार प्रदेश में करीब 8 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद के लिए उपलब्ध है, इसलिए खरीद का लक्ष्य बढ़ाना आवश्यक है।
लाखों किसानों ने कराया पंजीकरण
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3.47 लाख किसानों ने मूंग बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से केवल 82 हजार किसानों से ही खरीद हो सकी है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार कर रहे हैं और आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
धरनास्थल पर ही बना रहे भोजन
आंदोलन की लंबी तैयारी किसानों की रणनीति में साफ दिखाई दे रही है। धरनास्थल पर किसान स्वयं दाल-बाटी और अन्य भोजन बनाते नजर आए। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय तक आंदोलन चलाने की पूरी तैयारी के साथ भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक वे धरनास्थल नहीं छोड़ेंगे।
ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें
संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद, खरीदी का कोटा बढ़ाना, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित करना, खरीद और भुगतान में हो रही देरी समाप्त करना, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा तथा कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान शामिल है।
पुलिस बोली- प्रदर्शन शांतिपूर्ण
मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि किसानों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कहीं भी लाठीचार्ज नहीं किया गया है। प्रशासन लगातार किसान नेताओं के संपर्क में है और सरकार तथा किसानों के बीच बातचीत जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और ट्रैफिक प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई है।
फिलहाल किसानों ने साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई लंबी चल सकती है। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी है, क्योंकि उसी से यह तय होगा कि आंदोलन खत्म होगा या आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा।