CJP Protest: छात्रों के प्रदर्शन पर किरण बेदी का सुझाव, PM मोदी और अमित शाह को बताया समाधान

KNEWS DESK – नीट पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व राज्यपाल किरण बेदी ने केंद्र सरकार को प्रदर्शन से निपटने का एक अलग मॉडल सुझाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार दो पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को टैग किया और छात्रों व पुलिस के बीच टकराव रोकने के उपाय बताए।

‘पहली पंक्ति में सिविल डिफेंस को तैनात करें’

किरण बेदी ने सुझाव दिया कि प्रदर्शन के दौरान सबसे आगे सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को तैनात किया जाए। उन्होंने इसकी तुलना सीमाओं पर बीएसएफ की तैनाती से करते हुए कहा कि सिविल डिफेंस पहली सुरक्षा पंक्ति का काम कर सकता है, जबकि रायट पुलिस को कुछ दूरी पर स्टैंडबाय रखा जाए और केवल जरूरत पड़ने पर ही आगे भेजा जाए।

उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों में पहले से सिविल डिफेंस की व्यवस्था मौजूद है, जिसे अतिरिक्त प्रशिक्षण देकर इस तरह की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार किया जा सकता है।

‘छात्रों और पुलिस का आमना-सामना टाला जा सकता है’

पूर्व आईपीएस अधिकारी का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच सीधा टकराव काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस में महिला और पुरुष दोनों स्वयंसेवकों को शामिल किया जाए, जबकि रायट पुलिस पीछे रहकर स्थिति पर नजर बनाए रखे।

उनके मुताबिक, यदि सिविल डिफेंस कर्मियों पर हमला होता है या उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ती है, तभी रायट पुलिस को हस्तक्षेप करना चाहिए।

सिविल डिफेंस को सुरक्षात्मक उपकरण देने की सलाह

किरण बेदी ने कहा कि सिविल डिफेंस के जवानों को शील्ड, बॉडी आर्मर और हेलमेट जैसे सुरक्षात्मक उपकरण दिए जाने चाहिए, ताकि वे पत्थरबाजी या अन्य हमलों से खुद को सुरक्षित रख सकें। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास लाठियां नहीं होनी चाहिए।

उनका कहना है कि इससे प्रदर्शनकारियों पर भी जिम्मेदारी आएगी कि वे ऐसी कोई हिंसक हरकत न करें, जिससे पुलिस को बल प्रयोग के लिए आगे आना पड़े।

किरण बेदी ने अपनी पोस्ट में कहा कि सशस्त्र या रायट पुलिस का इस्तेमाल केवल तब किया जाना चाहिए, जब लोगों की जान-माल की सुरक्षा पर वास्तविक खतरा हो। उनके अनुसार, यदि पहली पंक्ति में सिविल डिफेंस रहेगा तो वह घटनाओं का निष्पक्ष गवाह भी बनेगा और बाद में लगने वाले आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति भी काफी हद तक कम हो सकती है।

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