KNEWS DESK- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिवंगत भरत तिवारी के परिवार के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी और एक परिजन को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाएगी। यह फैसला भरत तिवारी की मौत से जुड़े मामले की न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट सामने आने के बाद लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी। सरकार ने यह भी कहा है कि आयोग की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और सुझावों के आधार पर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

24 जुलाई को परिवार से मिले थे CM
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने परिवार को मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया था। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को न्याय मिलेगा।
अब जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले को मामले में पीड़ित परिवार को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
31 जुलाई को पुलिसकर्मी गिरफ्तार
भरत तिवारी मामले में 31 जुलाई को एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार भी किया गया था। आरा के पुलिस अधीक्षक राज ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया था कि मामले में शामिल पुलिसकर्मी अक्षय को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की थी।
अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
17 जून को पुलिस ऑपरेशन में हुई थी मौत
भरत भूषण तिवारी की मौत 17 जून 2026 को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए पुलिस ऑपरेशन के दौरान हुई थी। पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर अवैध हथियार से हमला किया था। पुलिस ने दावा किया था कि जवाबी कार्रवाई में आत्मरक्षा के दौरान गोली चली, जिसमें उनकी मौत हो गई।
हालांकि, इस पुलिस कार्रवाई को लेकर परिवार और कुछ ग्रामीणों ने सवाल उठाए थे। परिजनों की ओर से आरोप लगाया गया था कि यह सामान्य मुठभेड़ नहीं बल्कि फर्जी एनकाउंटर था। इसके बाद मामले की जांच की मांग तेज हुई और सरकार ने जांच आयोग का गठन किया।
अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार का फैसला
जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद बिहार सरकार ने परिवार के हित में आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के ऐलान के मुताबिक, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अब सभी की नजरें जांच की आगे की प्रक्रिया और आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर हैं। सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और सुझावों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, परिवार को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद उन्हें न्याय मिलेगा।
भरत तिवारी मामले में पुलिस कार्रवाई, आरोपी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी और अब परिवार को आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी के ऐलान ने इस पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।