कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल में तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिलाए जाने का दावा किया है। राज्य के खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रिजवान अरशद के मुताबिक, लीगल मेट्रोलॉजी विभाग की जांच में कई कंपनियों के पेट्रोल के नमूनों में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल पाया गया। उन्होंने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
Knews Desk- मंत्री रिजवान अरशद के अनुसार, इंडियन ऑयल के सामान्य पेट्रोल में करीब 30 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का आरोप है, जबकि मौजूदा नियमों के तहत कंपनियों को अधिकतम 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की छूट है। कर्नाटक के लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने पेट्रोल के नमूनों की जांच की, जिसमें कई नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिला।
विभाग के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पंपों पर बेचे जा रहे पेट्रोल में 31.2 प्रतिशत इथेनॉल पाया गया। वहीं, HPCL के एमएस-पावर पेट्रोल में 30.5 प्रतिशत और एमएस पेट्रोल में 27 प्रतिशत इथेनॉल मिला। BPCL के एमएस-स्पीड पेट्रोल में 26 प्रतिशत, नायरा के एमएस पेट्रोल में 25.5 प्रतिशत और IOCL के एमएस पेट्रोल में 20.8 प्रतिशत इथेनॉल पाया गया।
सरकार के मुताबिक, अप्रैल 2026 में जारी आदेश के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाना अपराध माना जाएगा। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में कंपनियों को छूट दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। नियमों का उल्लंघन होने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें 3 महीने से 7 साल तक की जेल का प्रावधान है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग को भारत के लिए जरूरी बताया जाता है, क्योंकि इससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। देश में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर आयात बिल पर पड़ता है।