KNEWS DESK- भारतीय वायुसेना आज दोपहर 2 बजे सुल्तानपुर के पास एक महत्वपूर्ण इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड एक्टिवेशन अभ्यास आयोजित करने जा रही है। यह अभ्यास नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य आपात परिस्थितियों में सड़कों को वैकल्पिक रनवे के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारियों को परखना है।
इस दौरान वायुसेना अपने अत्याधुनिक लड़ाकू और परिवहन विमानों की क्षमता का प्रदर्शन करेगी। अभ्यास में सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमान सड़क पर टच-एंड-गो ऑपरेशन करेंगे। वहीं, सी-295 और एएन-32 जैसे भारी मालवाहक विमान भी इस अस्थायी रनवे पर उतरने का अभ्यास करेंगे।
अभ्यास का एक और आकर्षक हिस्सा एमआई-17 हेलीकॉप्टर के जरिए किया जाने वाला स्लिदरिंग ऑपरेशन होगा, जिसमें वायुसेना के जवान हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे तेजी से जमीन पर उतरेंगे। यह पूरी गतिविधि नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय में संचालित की जा रही है ताकि सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहे।अभ्यास के दौरान सड़क के एक हिस्से पर यातायात को डायवर्ट किया जाएगा, जिससे आम लोगों को कम से कम परेशानी हो और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहेगा।
ऐसे अभ्यास युद्ध जैसी परिस्थितियों में बेहद अहम साबित होते हैं। यदि पारंपरिक एयरबेस क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो ये वैकल्पिक रनवे वायुसेना को अपनी संचालन क्षमता बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह त्वरित तैनाती, आपूर्ति और राहत कार्यों को भी मजबूत बनाते हैं।
इसके अलावा, इस तरह के अभ्यास नागरिक प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया की दक्षता को भी परखते हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी ये वैकल्पिक रनवे प्रभावित क्षेत्रों तक तेजी से सहायता पहुंचाने में सहायक होते हैं।
पिछले कुछ समय में वायुसेना ने देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के अभ्यासों की संख्या बढ़ाई है। हाल ही में पूर्वोत्तर क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास भी इसी प्रकार का अभ्यास किया गया था। वायुसेना की योजना है कि देशभर में करीब 28 ऐसे स्थान विकसित किए जाएं, जहां जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय राजमार्गों को अस्थायी रनवे में बदला जा सके।