Knews Desk-भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के सीमांचल क्षेत्र में इन दिनों नेपाली बहुओं की नागरिकता को लेकर बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। पूर्णिया जिला प्रशासन ने ऐसी नेपाली महिलाओं के लिए विशेष प्रक्रिया शुरू की है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों से विवाह कर लिया है और लंबे समय से भारत में रह रही हैं। इस पहल का उद्देश्य इन महिलाओं को भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया से जोड़ना है।
प्रशासन के अनुसार, सीमांचल के पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जैसे जिलों में बड़ी संख्या में नेपाली मूल की महिलाएं भारतीय परिवारों में विवाह के बाद रह रही हैं। इनमें से कई महिलाएं वर्षों से भारत में रह रही हैं, लेकिन नागरिकता न मिलने के कारण सरकारी योजनाओं और कई सुविधाओं से वंचित हैं।

अब केंद्र सरकार के नियमों के तहत ऐसे मामलों में आवेदन की प्रक्रिया को सरल किया गया है। जिला प्रशासन ने प्रखंड स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को आवश्यक दस्तावेजों और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी देना शुरू कर दिया है। आवेदक को गृह मंत्रालय के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। आवेदन के लिए विवाह प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शपथ पत्र, पासपोर्ट और पति की भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज जरूरी हैं। प्रशासन ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विशेष टास्क फोर्स भी गठित की है, जिसमें पुलिस, निर्वाचन विभाग और प्रखंड स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
इस अभियान के बीच भारत-नेपाल संबंधों में नागरिकता नियमों के अंतर पर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां भारत नेपाली महिलाओं के लिए नागरिकता प्रक्रिया को सरल बना रहा है, वहीं नेपाल में भारतीय नागरिकों के लिए नियम काफी सख्त हैं। नेपाल में भारतीय पुरुषों को न तो आसान नागरिकता मिलती है और न ही संपत्ति खरीदने की अनुमति होती है। इसके अलावा नेपाल में हाल के वर्षों में सीमा व्यापार, वाहन प्रवेश और छोटे लेन-देन पर लगे प्रतिबंधों को लेकर भी तनाव देखा गया है। वहीं दूसरी ओर भारत में विवाह के आधार पर नागरिकता की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है।
फिलहाल सीमांचल क्षेत्र में यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में आवेदन सामने आ रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे सीमा क्षेत्र के सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को कानूनी मजबूती मिलेगी और वर्षों से जुड़े भारत-नेपाल संबंध और अधिक स्पष्ट व व्यवस्थित होंगे।