KNews Desk: बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI देश में वकालत के पेशे को नियंत्रित करने वाली प्रमुख वैधानिक संस्थाओं में से एक है। वकीलों के पेशेवर आचरण से लेकर कानूनी शिक्षा के मानकों तक, BCI की भूमिका काफी अहम है। हालिया NALSAR विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने BCI की शक्तियों और उनकी सीमाओं को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ स्टूडेंट के वकील बनने से पहले उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार BCI या किसी स्टेट बार काउंसिल के पास नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान की भूमिका होती है।
BCI की स्थापना कब हुई और इसमें कौन होते हैं सदस्य?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 4 के तहत हुई थी। कानून के मुताबिक, BCI में प्रत्येक स्टेट बार काउंसिल से एक सदस्य चुना जाता है। इसके अलावा भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल इसके पदेन सदस्य होते हैं।
BCI का प्रमुख काम वकीलों के पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानक तय करना, कानूनी शिक्षा के मानकों को निर्धारित करना और देश में वकालत के पेशे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को नियंत्रित करना है।
BCI का चुनाव सीधे वकील नहीं करते
BCI की चुनाव प्रक्रिया को समझना जरूरी है, क्योंकि देशभर के वकील सीधे BCI या उसके चेयरमैन का चुनाव नहीं करते। यह प्रक्रिया राज्य स्तर से शुरू होकर ऊपर तक जाती है।
पहला स्तर: स्टेट बार काउंसिल का चुनाव
सबसे पहले स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों का चुनाव होता है। एडवोकेट्स एक्ट के तहत 5,000 तक वोटर वाली स्टेट बार काउंसिल में 15 सदस्य चुने जाते हैं। 5,000 से अधिक और 10,000 तक वोटर होने पर 20 सदस्य और 10,000 से ज्यादा वोटर होने पर 25 सदस्य चुने जाते हैं।
यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट यानी STV प्रणाली के जरिए होता है। मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में चुन सकता है। कानून में यह भी प्रावधान है कि करीब आधे निर्वाचित सदस्य ऐसे होने चाहिए, जिनके पास राज्य की सूची में वकील के रूप में कम से कम 10 साल का अनुभव हो।
दूसरा स्तर: स्टेट बार काउंसिल से BCI तक
स्टेट बार काउंसिल के गठन के बाद उसके सदस्य अपने बीच से एक प्रतिनिधि को BCI के लिए चुनते हैं। यानी कोई आम वकील सीधे BCI सदस्य के लिए मतदान नहीं करता, बल्कि पहले स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों का चुनाव करता है और फिर चुने गए सदस्य अपने बीच से BCI के प्रतिनिधि का चयन करते हैं।
तीसरा स्तर: BCI चेयरमैन का चुनाव
BCI में पहुंचने के बाद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव BCI के सदस्य अपने बीच से करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि BCI चेयरमैन को देशभर के वकील सीधे वोट देकर नहीं चुनते।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI की शक्तियों पर क्या कहा?
NALSAR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने BCI की शक्तियों की सीमा स्पष्ट की है। कोर्ट ने कहा कि किसी लॉ स्टूडेंट के वकील बनने से पहले उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार BCI या स्टेट बार काउंसिल के पास नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, जब कोई व्यक्ति वकील के रूप में पेशे में प्रवेश कर लेता है, तब उसके पेशेवर आचरण को लेकर BCI और स्टेट बार काउंसिल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
BCI चेयरमैन को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
2 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नई BCI के चुनाव होने तक वह अंतरिम चेयरमैन की भूमिका में रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने नई स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि नई टीम की घोषणा के बाद तीन सप्ताह के भीतर चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, अन्य पदाधिकारियों और BCI प्रतिनिधि का चुनाव किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि BCI के बड़े नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाए।
इस तरह BCI के पास वकालत के पेशे और कानूनी शिक्षा से जुड़े मामलों में व्यापक अधिकार हैं, लेकिन NALSAR मामले ने यह भी साफ कर दिया है कि उसकी शक्तियां कानून द्वारा तय सीमाओं के भीतर ही हैं।