धरती के संरक्षण से ग्रीन जॉब्स तक… Dharti Samman Conclave-2026 में पर्यावरण पर हुआ मंथन

दिल्ली में आयोजित धरती सम्मान-इंडिया ग्रीन ग्रोथ मिशन कॉन्क्लेव-2026 में पर्यावरण संरक्षण, ग्रीन ग्रोथ, ग्रीन जॉब्स और सतत विकास जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में नीति निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग जगत, उद्यमी और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए.

KNews Desk: देश की राजधानी दिल्ली में धरती सम्मान-इंडिया ग्रीन ग्रोथ मिशन कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन को लेकर चर्चा करना रहा. कॉन्क्लेव में 120 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इनमें नीति निर्माता, उद्योग जगत से जुड़े लोग, वैज्ञानिक, इंटरप्रेन्योर और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं.

कार्यक्रम के दौरान धरती और मानव जीवन के बीच संबंध, ग्रीन ग्रोथ, ग्रीन जॉब्स, सस्टेनेबिलिटी, इको-टूरिज्म और पर्यावरण के क्षेत्र में हो रहे नए इनोवेशन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की रफ्तार बढ़ाने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है.

धरती सम्मान मेडल समारोह में पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण ने प्रकृति के संसाधनों के इस्तेमाल के साथ उनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि देश का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए. उन्होंने लोगों में धरती के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण की भावना विकसित करने पर जोर दिया.

ग्रीन ग्रोथ के साथ ग्रीन जॉब्स पर भी चर्चा

नेट ग्रीन फाउंडेशन और देवतारा फाउंडेशन के डायरेक्टर उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि धरती सम्मान का उद्देश्य पर्यावरण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों के प्रयासों को पहचान दिलाना है. साथ ही इस मंच के जरिए दूसरे लोगों को भी पर्यावरण के लिए काम करने के लिए प्रेरित करना है.

कार्यक्रम की शुरुआत नेट ग्रीन फाउंडेशन की नेहा एडविन के उद्घाटन संबोधन से हुई. उन्होंने पर्यावरण जागरूकता, क्लाइमेट एक्शन और सतत विकास को लेकर फाउंडेशन की पहल के बारे में जानकारी दी. इसके बाद उमेश शर्मा और नेट ग्रीन फाउंडेशन एवं देवतारा फाउंडेशन की सीईओ व ग्रुप डायरेक्टर सुरभि गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया.

सुरभि गुप्ता ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता. इसे वास्तविक काम, नए इनोवेशन और ऐसे परिणामों में बदलना होगा जिन्हें मापा जा सके.

यूनेस्को रीजनल ऑफिस फॉर साउथ एशिया, दिल्ली के चीफ ऑफ नेचुरल साइंसेज डॉ. बेन्नो बोअर ने उद्घाटन सत्र में कहा कि मौजूदा चुनौती विकास को रोकने की नहीं, बल्कि विकास की परिभाषा को बदलने की है. ऐसा विकास जरूरी है जिसमें मानव समृद्धि प्रकृति की कीमत पर न हो. उन्होंने ऊर्जा, परिवहन, कृषि, निर्माण और उपभोग से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव की आवश्यकता बताई.

वहीं, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के तहत स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स के सीईओ अर्पित शर्मा ने ग्रीन स्किल्स को भविष्य की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि तेजी से उभरते ग्रीन सेक्टर के लिए युवाओं और प्रोफेशनल्स को नए कौशल से तैयार करना जरूरी है, ताकि आने वाले समय में रोजगार के नए अवसरों का लाभ उठाया जा सके.

पैनल डिस्कशन में संरक्षण और महिलाओं की भूमिका पर चर्चा

कॉन्क्लेव में ‘व्हेयर नेचर थ्राइव्स, कम्युनिटीज प्रॉस्पर’ विषय पर पहला पैनल डिस्कशन आयोजित हुआ. इसकी सह-अध्यक्षता डॉ. बेन्नो बोअर और यूनेस्को रीजनल ऑफिस फॉर साउथ एशिया की नेशनल प्रोग्राम ऑफिसर फॉर नेचुरल साइंसेज डॉ. नेहा मिधा ने की. चर्चा में समुदायों को केंद्र में रखकर पर्यावरण संरक्षण की रणनीति पर जोर दिया गया.

दूसरे पैनल का विषय ‘वुमेन इन द ग्रीन ट्रांजिशन: फ्रॉम अपॉर्च्युनिटी टू लीडरशिप’ रहा. इसकी अध्यक्षता वॉटर डाइजेस्ट की डायरेक्टर एवं एडिटर अनुपमा माधोक सूद ने की. इस सत्र में ग्रीन इकोनॉमी में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व की संभावनाओं पर चर्चा हुई.

इसके अलावा ‘इको-टूरिज्म फॉर ए ग्रीनर फ्यूचर’ विषय पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के डायरेक्टर (इको) पुष्प कुमार के. और अनुपमा माधोक सूद के बीच संवाद हुआ. इसमें पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण के संरक्षण के बीच संतुलन कायम करने के तरीकों पर विचार किया गया.

सुबह के सत्र में CGTMSE के एसोसिएट अविनाश सिंह ने विशेष प्रेजेंटेशन दिया. वहीं आईआईटी कानपुर की डॉ. मैरा सिंह ने नेट जीरो काउंसिल की शुरुआत की.

इनोवेशन शोकेस में सामने आए कई नए समाधान

कॉन्क्लेव के दोपहर के सत्र की अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ. राजीव जिंदल ने की. इस दौरान सस्टेनेबिलिटी से जुड़े कई इनोवेशन प्रस्तुत किए गए.

इनमें सर्कुलर इकोनॉमी और वेस्ट मैनेजमेंट, क्लाइमेट-टेक एवं क्लीन एनर्जी, वाटर और एग्रीकल्चर सस्टेनेबिलिटी तथा सस्टेनेबल अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया.

इनोवेशन शोकेस में वेस्ट प्लास्टिक को केमिकल रिसाइक्लिंग के जरिए हाई-ग्रेड rPET में बदलने, पुराने टायरों से पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और सिगरेट बट से उपयोगी उत्पाद बनाने जैसे समाधान पेश किए गए. इसके अलावा केले के कचरे से लेदर के विकल्प, डीकार्बोनाइजेशन आधारित क्लाइमेट-टेक समाधान, टिकाऊ कृषि तकनीक, बागवानी बायोमास से मिट्टी के पुनर्जीवन और लो-कार्बन कंस्ट्रक्शन मैटेरियल से जुड़े इनोवेशन भी प्रदर्शित किए गए.

सत्र के समापन पर डॉ. राजीव जिंदल ने कहा कि नए इनोवेशन को केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहिए. उन्हें डेमोंस्ट्रेशन से आगे ले जाकर बड़े स्तर पर लागू करने और वास्तविक प्रभाव पैदा करने की दिशा में काम करना जरूरी है.

धरती सम्मान मेडल से सस्टेनेबिलिटी लीडर्स का सम्मान

कॉन्क्लेव का समापन धरती सम्मान मेडल एवं सम्मान समारोह के साथ हुआ. इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, इनोवेशन और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सस्टेनेबिलिटी लीडर्स और चेंजमेकर्स को सम्मानित किया गया.

समारोह में कॉन्क्लेव से जुड़े पार्टनर्स और सहयोगी संस्थानों को भी सम्मान दिया गया. इस मौके पर डॉ. बेन्नो बोअर विशेष अतिथि और आचार्य बालकृष्ण गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद रहे. फेडरल बैंक के हेड ऑफ गवर्नमेंट एंड इंस्टीट्यूशनल बिजनेस-नॉर्थ इंडिया कमल चुघ समेत कई अन्य अतिथि भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

इस आयोजन को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय और उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) का सहयोग मिला. स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (SIIC), आईआईटी कानपुर कॉन्क्लेव का नॉलेज पार्टनर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग स्ट्रैटेजिक टूरिज्म पार्टनर और TV9 ऑफिशियल न्यूज पार्टनर के तौर पर जुड़ा रहा.

इसके अलावा फेडरल बैंक बैंकिंग पार्टनर, एंड्रिट्ज ग्रीन पार्टनर और अन्य संस्थाएं स्पेशल पार्टनर, प्लेटिनम पार्टनर और रेडियो पार्टनर के तौर पर आयोजन का हिस्सा रहीं.

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