अहमदाबाद विमान हादसा: जांच पूरी होने तक गोपनीय रहेंगे सबूत, AAIB ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

KNEWS DESK- अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच को लेकर नागरिक उड्डयन दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। AAIB ने अपने हलफनामे में कहा है कि दुर्घटना से जुड़े संवेदनशील सबूत, जिसमें कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (CVR) और अन्य अहम जानकारियां शामिल हैं, फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।

AAIB ने अदालत को बताया कि भारतीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय जांच नियमों के तहत ऐसी जानकारियों को गोपनीय रखना जरूरी है। ब्यूरो का कहना है कि जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रभावी बनाए रखने के लिए दुर्घटना से जुड़े कुछ दस्तावेज और रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।

हलफनामे में बताया गया कि केवल कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग ही नहीं, बल्कि उड़ान से संबंधित वीडियो फुटेज, क्रू सदस्यों के बयान, ऑपरेशन से जुड़ी बातचीत और पीड़ितों की निजी जानकारियों को भी गोपनीय रखना जांच का हिस्सा है। AAIB ने कहा कि इन जानकारियों का सार्वजनिक होना जांच की दिशा और निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। AAIB ने यह हलफनामा एयर इंडिया विमान हादसे में जान गंवाने वाले पायलट के पिता पुष्कर राज सभरवाल की ओर से दाखिल याचिका के जवाब में दिया है। याचिका में दुर्घटना से जुड़े सबूतों और जांच प्रक्रिया को लेकर जानकारी मांगी गई थी।

ब्यूरो ने अपने जवाब में अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों का भी हवाला दिया। AAIB के मुताबिक, विमान दुर्घटनाओं की जांच के लिए ICAO के ‘एनेक्स 13’ में स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। इसके तहत दुर्घटना वाले देश को जांच शुरू करने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इसमें विमान के रजिस्ट्रेशन वाले देश, ऑपरेटर देश, डिजाइन और निर्माण से जुड़े देशों की भी भूमिका होती है। AAIB ने कहा कि ऐसी जांच केवल स्थानीय स्तर की कार्रवाई नहीं होती, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत की जाने वाली प्रक्रिया होती है। इसमें संबंधित देशों के अधिकृत प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जिनकी भूमिका और जिम्मेदारियां पहले से निर्धारित होती हैं।

हलफनामे में कहा गया कि दुर्घटना की जांच का उद्देश्य हादसे के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय तैयार करना है। इसी वजह से जांच से जुड़ी संवेदनशील सामग्री को सुरक्षित रखना जरूरी होता है। AAIB का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आवश्यक जानकारी साझा की जा सकती है, लेकिन जांच के दौरान सभी सबूतों को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।

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