Knews Desk- विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हो रही प्रगति से अब मानव मस्तिष्क की संरचना को पहले से कहीं अधिक विस्तार से समझना संभव हो रहा है। इसी दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास का सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर (SGBC) एक महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस परियोजना के तहत मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार की जा रही हैं, जिनकी मदद से मस्तिष्क की कोशिकाओं, उनकी संरचना और विभिन्न हिस्सों के बीच संबंधों का अध्ययन किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में इस पहल की सराहना की थी।इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य 100 से अधिक मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग करना है। इसमें जीवन के अलग-अलग चरणों में मस्तिष्क की संरचना का अध्ययन किया जाएगा। भ्रूण अवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक मस्तिष्क में होने वाले बदलावों को डिजिटल रूप में दर्ज करने से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की बनावट और कोशिकाओं में किस तरह के परिवर्तन होते हैं। इस जानकारी का उपयोग सामान्य मस्तिष्क संरचना और बीमारियों से प्रभावित मस्तिष्क के बीच अंतर को समझने में किया जा सकता है।
इस रिसर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्ट्रोक से प्रभावित मस्तिष्क का डिजिटल एटलस तैयार करना है। इसके तहत 1,000 से अधिक विस्तृत ब्रेन सेक्शन का अध्ययन किया जा रहा है। इन सेक्शन की मदद से न्यूरॉन की स्थिति, मस्तिष्क में सूजन, ब्लड-ब्रेन बैरियर को होने वाले नुकसान और ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाले बदलावों को समझने का प्रयास किया जाएगा। स्ट्रोक के दौरान मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए इन बदलावों का विस्तृत अध्ययन बीमारी की प्रकृति को समझने में उपयोगी साबित हो सकता है। इससे भविष्य में बेहतर जांच तकनीक और उपचार के नए विकल्प विकसित करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।मस्तिष्क की 3D मैपिंग से प्राप्त होने वाला डेटा बेहद विशाल और जटिल होता है। इसे व्यवस्थित करने, प्रोसेस करने और विश्लेषण करने के लिए उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग तकनीक की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से इस परियोजना में भारत के परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से मृत्यु के बाद प्राप्त मानव मस्तिष्क की विस्तृत संरचना को डिजिटल 3D मैप में बदला जाता है, जिससे वैज्ञानिक अलग-अलग हिस्सों का विस्तार से अध्ययन कर सकें।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 200 से अधिक रिसर्चर्स, इंजीनियर और तकनीशियन योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा, भारत के 10 से ज्यादा मेडिकल संस्थान और 10 से अधिक देशों के 30 से ज्यादा प्रमुख शोधकर्ता भी इस प्रयास में सहयोग कर रहे हैं। तैयार किए गए डिजिटल एटलस को शोधकर्ताओं और मेडिकल विशेषज्ञों के लिए उपलब्ध कराया गया है।विशेषज्ञों के लिए यह परियोजना मानव मस्तिष्क की संरचना और बीमारियों के प्रभावों को समझने का एक महत्वपूर्ण संसाधन बन सकती है। हालांकि, इस रिसर्च के निष्कर्षों को उपचार में बदलने के लिए आगे भी वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होंगे। उम्मीद है कि आने वाले समय में 3D मैपिंग और सुपरकंप्यूटिंग तकनीक के संयुक्त उपयोग से स्ट्रोक समेत कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान, अध्ययन और उपचार की दिशा में नई संभावनाएं विकसित होंगी।