‘गजब रात’ में मनोज बाजपेयी का दमदार दांव, भ्रष्ट पुलिसवाले की कहानी में खुलती है ताकतवर लोगों की पोल

नेटफ्लिक्स की फिल्म में मनोज बाजपेयी एक घूसखोर पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आते हैं। एक रात, एक रहस्यमयी युवती और बड़े लोगों के कथित गठजोड़ की कहानी दर्शकों को अंत तक बांधे रखने की कोशिश करती है।

Knews Desk – मनोज बाजपेयी अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाते हैं और उनकी फिल्म ‘गजब रात’ में भी एक अलग तरह की कहानी देखने को मिलती है। पहले ‘घूसखोर पंडत’ नाम से चर्चा में रही इस फिल्म का शीर्षक बाद में बदल दिया गया। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय निर्वित की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी एक ऐसी रात के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें अपराध, सत्ता, पैसे और जांच के बीच कई परतें खुलती हैं। फिल्म का मूल सवाल यह है कि जब जांच करने वाले तंत्र के भीतर ही भ्रष्टाचार हो, तो सच सामने कैसे आएगा।

विवाद के बाद बदला गया फिल्म का नाम

फिल्म का शुरुआती शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ था, जिसे लेकर विवाद हुआ। बाद में इसका नाम बदलकर ‘गजब रात’ कर दिया गया। फिल्म का निर्माण नीरज पांडे ने किया है, जबकि इसकी कहानी दीपक वेंकटेशन की है। निर्देशन रितेश शाह ने किया है। मनोज बाजपेयी के किरदार का नाम भी पहले अजय दीक्षित बताया गया था, जिसे बदलकर अजय निर्वित कर दिया गया।

फिल्म की कहानी दिल्ली के कनॉट प्लेस से शुरू होती है। पुलिस इंस्पेक्टर अजय निर्वित अपनी टीम के साथ एक होटल में छापा मारता है। वहां कई जोड़ों को पकड़ा जाता है और होटल मालिक लवली की गिरफ्तारी के बाद उन्हें छोड़ने को लेकर सौदेबाजी शुरू होती है। इसी बीच एक दूसरी घटना सामने आती है। एक युवती गंभीर रूप से घायल हालत में सड़क पर मिलती है और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं।

अजय को इस मामले की जांच सौंपी जाती है। समाजसेवी नेहा प्रभु भी उसके साथ रहती हैं और अस्पताल में भर्ती युवती की हालत पर नजर रखती हैं। युवती के साथ क्या हुआ, उसे चलती कार से फेंका गया या वह खुद कूदकर भागने की कोशिश कर रही थी—ऐसे कई सवाल कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

युवती के मामले में CBI और NIA की दिलचस्पी

कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती युवती के मामले में सीबीआई अधिकारी सुनील मधोक और एनआईए अधिकारी करण गिल की दिलचस्पी सामने आती है। अजय निर्वित को समझ नहीं आता कि एक युवती के मामले में इतनी बड़ी एजेंसियां इतनी सक्रिय क्यों हैं। वह खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रहा है और इस रात भी अपने फायदे के सौदे तलाश रहा है, लेकिन धीरे-धीरे उसे इस मामले के पीछे किसी बड़े नेटवर्क की आशंका होने लगती है।

मनोज बाजपेयी ने भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के किरदार में चालाकी, लालच और भावनात्मक बदलाव को दिखाने की कोशिश की है। कहानी आगे बढ़ने के साथ अजय का नजरिया बदलता है और उसे एहसास होता है कि जिन लोगों पर ईमानदारी से जांच करने की जिम्मेदारी है, वे भी कथित तौर पर इस पूरे मामले से जुड़े हो सकते हैं।

श्रद्धा दास समाजसेवी नेहा प्रभु के किरदार में नजर आती हैं। अक्षय ओबेरॉय और साकिब सलीम की भूमिकाएं भी कहानी को आगे बढ़ाती हैं। अदिति संध्या शर्मा इन्वेस्टिगेटिव पत्रकार आर्या साहनी के किरदार में दिखाई देती हैं। दिव्या दत्ता और नुसरत भरूचा भी फिल्म का हिस्सा हैं।

फिल्म का नया नैरेटिव क्या है?

‘गजब रात’ की कहानी भ्रष्टाचार को केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सत्ता, प्रभावशाली लोगों और जांच व्यवस्था के बीच संभावित गठजोड़ पर सवाल उठाती है। फिल्म में अजय निर्वित का बदलाव कहानी का अहम हिस्सा है। एक ऐसा पुलिस अधिकारी, जो खुद रिश्वतखोरी में शामिल है, धीरे-धीरे उस व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होने लगता है, जिसका वह हिस्सा रहा है।

फिल्म की समीक्षा के मुताबिक, इसकी कहानी और संवाद दर्शकों को करीब दो घंटे तक बांधे रखते हैं। मनोज बाजपेयी का अभिनय इसकी प्रमुख खूबियों में शामिल है। फिल्म उन दर्शकों को पसंद आ सकती है, जिन्हें क्राइम थ्रिलर, जांच और सत्ता के इर्द-गिर्द घूमती कहानियां पसंद हैं।

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