टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: चारों आरोपी 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में, गैंग कनेक्शन की जांच तेज

मुंबई क्राइम ब्रांच हथियारों की सप्लाई, डिलीट किए गए डिजिटल डेटा और वॉइस नोट्स की जांच कर रही है। अदालत में पुलिस और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।

Knews Desk– अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में आरोपी सुमित, कुणाल, राधा और बबीता को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने अदालत में दावा किया कि फायरिंग की वारदात पहले से रची गई साजिश का हिस्सा थी। जांच एजेंसी हथियारों की सप्लाई, डिजिटल सबूतों और कथित गैंग कनेक्शन की पड़ताल कर रही है।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल फोन से तस्वीरें, वीडियो और अन्य डिजिटल डेटा डिलीट किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस को कुछ वॉइस नोट भी मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर हथियारों की व्यवस्था और उन्हें रखने से जुड़ी बातचीत होने का दावा किया गया है। इन वॉइस नोट्स का विश्लेषण कर बातचीत में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि फायरिंग के बाद इस्तेमाल की गई पिस्तौल और बचे हुए कारतूस वापस ले जाने की योजना थी। पुलिस को संदेह है कि हथियारों को सूरत में ठिकाने लगाया गया। क्राइम ब्रांच यह भी पता लगा रही है कि हथियार किसने उपलब्ध कराए और आरोपियों को स्थानीय स्तर पर किसने मदद पहुंचाई।

गैंग लीडर अनिल पंडित की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, अभी यह स्पष्ट करना बाकी है कि आरोपियों का उससे सीधा संपर्क था या नहीं और वारदात में उसकी क्या भूमिका रही।

दूसरी तरफ, बचाव पक्ष ने पुलिस कस्टडी का विरोध किया। वकीलों ने दलील दी कि मोबाइल फोन, सिम कार्ड और वाहन पहले ही जब्त किए जा चुके हैं और पुलिस जरूरी सबूत जुटा चुकी है। बचाव पक्ष ने कहा कि वॉइस सैंपल न्यायिक हिरासत के दौरान भी लिए जा सकते हैं।

हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया। क्राइम ब्रांच अब हथियारों के नेटवर्क, डिजिटल साक्ष्यों और कथित साजिश से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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