भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों विपक्ष के निशाने पर हैं। इस बीच उनकी सैलरी, सरकारी सुविधाओं और कुल संपत्ति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। CEC को हर महीने 2.50 लाख रुपये का मूल वेतन मिलता है, जो कैबिनेट सचिव के वेतन के बराबर है। हालांकि, उनकी कुल संपत्ति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
Knews Desk- विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन ने राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले “फॉर्म 6” में बदलाव और मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) को लेकर CEC पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच यह जानना भी दिलचस्प है कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को हर महीने कितनी सैलरी और कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं।
ज्ञानेश कुमार की बेसिक मंथली सैलरी 2,50,000 रुपये है। यह वेतन कैबिनेट सचिव के वेतन के बराबर है। इसके अलावा CEC को 34,000 रुपये का मासिक भत्ता मिलता है। उन्हें सरकारी आवास, ड्राइवर के साथ सरकारी वाहन, सुरक्षा कवर, बिजली-पानी और टेलीफोन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। खुद और परिवार के लिए मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का मूल मासिक वेतन 2.50 लाख रुपये है। 2023 में कानून में बदलाव के बाद CEC और चुनाव आयुक्तों का वेतन कैबिनेट सचिव के वेतन के बराबर कर दिया गया।
CEC को मिलने वाली प्रमुख सुविधाओं में 34,000 रुपये का मासिक भत्ता शामिल है। हालांकि, CEC और चुनाव आयुक्तों ने स्वेच्छा से इस भत्ते पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट को छोड़ने का फैसला किया है।
इसके अलावा CEC को खुद, जीवनसाथी और परिवार के आश्रित सदस्यों के लिए LTC की सुविधा मिलती है। इसे भी स्वेच्छा से साल में तीन बार के बजाय एक बार कर दिया गया है।
उन्हें सरकारी आवास, ड्राइवर के साथ सरकारी गाड़ियां और सुरक्षा कवर भी मिलता है। CEC और उनके परिवार को मुफ्त या बहुत कम कीमत पर बिजली, पानी और टेलीफोन की सुविधा के साथ पूरा मेडिकल इलाज भी उपलब्ध कराया जाता है।
रिटायरमेंट के बाद उन्हें अच्छी पेंशन के साथ ऊंचे संवैधानिक पदों के अनुरूप अन्य लाभ भी मिलते हैं।
2023 में बदला CEC की सैलरी का नियम
1991 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का वेतन सुप्रीम कोर्ट के जजों के बराबर था। हालांकि, CEC और अन्य चुनाव आयुक्त बिल, 2023 के बाद उनकी सैलरी कैबिनेट सेक्रेटरी के वेतन के बराबर कर दी गई।
फिलहाल CEC और चुनाव आयुक्तों की सैलरी बराबर है, लेकिन दोनों के वेतन को तय करने की प्रक्रिया अलग-अलग आधार पर होती है। संविधान के आर्टिकल 125 के तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों का वेतन संसद के कानून से तय किया जाता है।
वहीं, कैबिनेट सचिव का वेतन केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार तय करती है। 2023 के कानून के बाद CEC और EC के वेतन को तय करने में सरकार की भूमिका बढ़ गई है।
कौन हैं ज्ञानेश कुमार?
ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं। वह 2024 में चुनाव आयुक्त बने और फरवरी 2025 में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली।
62 वर्षीय ज्ञानेश कुमार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी काम कर चुके हैं। वह 31 जनवरी 2024 को मिनिस्ट्री ऑफ कोऑपरेशन यानी सहकारिता मंत्रालय के सेक्रेटरी पद से रिटायर हुए थे। इससे पहले वह मिनिस्ट्री ऑफ पार्लियामेंट्री अफेयर्स में भी सेक्रेटरी के तौर पर काम कर चुके हैं।
अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान अहम जिम्मेदारी
अगस्त 2019 में जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया था, उस समय ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में कश्मीर डिवीजन के जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे।
2020 में एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर उन्होंने गृह मंत्रालय की एक विशेष डेस्क की जिम्मेदारी संभाली थी। यह डेस्क अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े मामलों को देख रही थी। इसमें ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन भी शामिल था।
इससे पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान कुमार 2007 से 2012 तक रक्षा मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी (डिफेंस प्रोडक्शन) के पद पर तैनात रहे थे।
IIT कानपुर से की BTech
ज्ञानेश कुमार का जन्म 27 जनवरी 1964 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में BTech किया है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में PG किया है। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया (ICFAI) से CFA की पढ़ाई भी की है। उनके पिता डॉक्टर थे, जबकि उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी रहे और बाद में उत्तर प्रदेश के आगरा में प्रिंसिपल के पद पर रहे।
CEC ज्ञानेश कुमार की कुल संपत्ति या नेटवर्थ को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर इस साल अप्रैल में TMC के पूर्व सांसद साकेत गोखले ने सवाल उठाए थे।
गोखले ने सवाल किया था कि ज्ञानेश कुमार की संपत्ति से जुड़ी जानकारी को RTI के तहत “निजी जानकारी” क्यों माना गया। उनका कहना था कि एक पूर्व IAS अधिकारी के तौर पर ज्ञानेश कुमार की संपत्ति से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
साकेत गोखले ने X पर अपनी RTI एप्लीकेशन और केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) से मिले जवाब को भी साझा किया था। उन्होंने 5 नवंबर 2025 को RTI दाखिल कर IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार द्वारा 2015 से 2023 के बीच दाखिल की गई अचल संपत्ति की जानकारी (IPR) का विवरण मांगा था।