उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। सपा ने दो सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं, लेकिन तीसरी सीट को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। गुर्जर नेता चौधरी रूद्रसेन, पूर्व सांसद सलीम शेरवानी और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप के नाम संभावित उम्मीदवारों के तौर पर चर्चा में हैं।
Knews Desk– उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 6 सीटें खाली हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के लिए प्रभावी विधायक संख्या 397 है। इस गणित के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी। बीजेपी के पास 256 विधायक हैं, जबकि सहयोगी दलों को मिलाकर NDA की संख्या 292 बताई जा रही है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों का समर्थन जोड़ने पर यह संख्या 294 तक पहुंचती है।
सपा ने राज्यसभा की दो सीटों के लिए राम गोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम घोषित कर दिए हैं। सपा के विधानसभा में 101 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के दो विधायक भी उसके साथ बताए जा रहे हैं। इस तरह सपा-कांग्रेस के पास कुल 103 विधायकों का समर्थन है। दो उम्मीदवारों के लिए 74 वोट की जरूरत होगी और इसके बाद 29 वोट बचेंगे।
तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। पार्टी के सामने करीब 8 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की चुनौती बताई जा रही है। RLD के करीब 3 और SBSP के 4 विधायक सपा के संपर्क में होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा पिछली बार बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले सपा विधायकों को भी अपने साथ बनाए रखना पार्टी के लिए अहम होगा।
बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने तीसरी सीट के दावेदारों के सामने एक शर्त रखी है। जो नेता जरूरी संख्या में विधायकों का समर्थन जुटाने में सक्षम होगा, उसकी दावेदारी मजबूत हो सकती है। इसी वजह से सलीम शेरवानी, रूद्रसेन चौधरी और अरविंद सिंह गोप के नाम चर्चा में हैं।
सलीम शेरवानी सपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं। वह पांच बार सांसद रह चुके हैं और केंद्र की गुजराल सरकार में मंत्री भी रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने बदायूं से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन बाद में पार्टी ने आदित्य यादव को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद शेरवानी की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं, हालांकि बाद में अखिलेश यादव ने उन्हें मना लिया था।
दूसरी ओर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख गुर्जर नेताओं में गिने जाने वाले रूद्रसेन चौधरी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में है। वह चौधरी यशपाल सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। रूद्रसेन ने 2012 में गंगोह विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दिसंबर 2017 में उन्हें सपा का सहारनपुर जिलाध्यक्ष बनाया गया। बाद में पार्टी संगठन में उनकी भूमिका बढ़ी और 2023 में उन्हें सपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया।
तीसरा नाम अरविंद सिंह गोप का है। सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप को अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिना जाता है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व उनके नाम पर भी विचार कर रहा है। उनके पक्ष में एक तर्क यह बताया जा रहा है कि राजा भैया की पार्टी का समर्थन उन्हें मिल सकता है। इसके अलावा सपा से बगावत करने वाले कुछ विधायकों के साथ भी उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं।
ऐसे में राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए सपा किस चेहरे पर भरोसा जताती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल पार्टी के सामने उम्मीदवार तय करने के साथ-साथ जरूरी विधायकों का समर्थन जुटाने की चुनौती भी है।