मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों पर चलेगा एक्शन, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सीलिंग और ध्वस्तीकरण के निर्देश

जोन-A में चिन्हित 16,726 अवैध और अनधिकृत निर्माणों पर जल्द कार्रवाई के आदेश, उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए पूर्व जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित

Knews Desk– मेरठ में अवैध और अनधिकृत निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जोन-A में चिन्हित 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इनमें रिहायशी और गैर-रिहायशी दोनों तरह के निर्माण शामिल हैं। कोर्ट ने कब्जाधारियों को हटाने के साथ इन संपत्तियों को सील करने और जरूरत के अनुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने मामले में एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाला यह आयोग मेरठ के बाहरी क्षेत्र उल्देपुर में जमीन की प्रकृति और वहां विकसित हुई अवैध रिहायशी कॉलोनियों की विस्तृत जांच करेगा।

उत्तर प्रदेश हाउसिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन पी. गुरुप्रसाद की रिपोर्ट पर विचार करते हुए कोर्ट ने उल्देपुर में बड़ी संख्या में अवैध रिहायशी कॉलोनियां विकसित होने पर चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ के विभिन्न इलाकों का निरीक्षण और सर्वे किया गया था और शहर को जोन-A, जोन-B, जोन-C और जोन-D में बांटा गया है।

जोन-A में सर्वे और निरीक्षण के लिए तैनात 16 टीमों ने कुल 16,726 निर्माणों को पूरी तरह अवैध या अनधिकृत पाया। इनमें 12,907 रिहायशी निर्माण, 874 रिहायशी एवं गैर-रिहायशी दोनों तरह के इस्तेमाल वाले निर्माण और 2,945 गैर-रिहायशी निर्माण शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जोन-A में चिन्हित सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए। कोर्ट के मुताबिक इस प्रक्रिया का पहला कदम कब्जाधारियों को हटाना और सभी निर्माणों को सील करना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ इमारतें जर्जर हो सकती हैं और उनके गिरने से जान-माल का नुकसान होने की आशंका है, इसलिए कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी चारों जोन के संबंध में कार्रवाई की जाए। अगली सुनवाई में जोन-B, जोन-C और जोन-D की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण अभियान जारी रखने और अगली सुनवाई तक कार्रवाई की अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

उल्देपुर के मामले में कोर्ट ने बताया कि पहले सील की गई 44 संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 20 संपत्तियों को पहले ही गिराया जा चुका है और उनके अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने बाकी 24 सील संपत्तियों को भी जल्द से जल्द गिराने का निर्देश दिया है।

न्यायिक आयोग यह भी जांच करेगा कि मेरठ डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी MDA पांच साल से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रही और इस दौरान इन अवैध रिहायशी कॉलोनियों को विकसित होने का अवसर कैसे मिला। आयोग यह भी जांच करेगा कि कहीं इन कॉलोनियों के निर्माण में MDA के अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं थी। इसके साथ ही जिम्मेदार लोगों की पहचान करने का काम भी आयोग करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अवैध निर्माणों के कारण दुर्भाग्यपूर्ण घटना में किसी निर्दोष व्यक्ति की जान जाती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मामले को दिसंबर में अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। कोर्ट ने तब तक अपने निर्देशों पर हुई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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