Knews Desk– नितिन नबीन ने 21 और 22 सितंबर को मेरठ और सहारनपुर का दौरा किया। यह दौरा मुख्य रूप से संगठन की तैयारियों, कार्यकर्ताओं से संवाद और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की जमीनी स्थिति की समीक्षा पर केंद्रित था। उनके मेरठ पहुंचने पर बड़ी संख्या में बुलडोजरों के जरिए स्वागत किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, बुलडोजरों से करीब पांच क्विंटल फूल बरसाए गए और क्रेन के जरिए भी माला पहनाई गई।हालांकि, दौरे के दूसरे दिन मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर स्वागत के लिए बीजेपी नेता और बुलडोजर मौजूद रहे, लेकिन नितिन नबीन का काफिला वहां नहीं रुका। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर स्वागत के तौर-तरीकों को लेकर चर्चा तेज हुई।
बताया गया कि नबीन ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्वागत के नाम पर बड़े शक्ति प्रदर्शन से बचने का संदेश दिया। इसके बजाय उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठन और बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया। उनके संदेश के मुताबिक बड़े होर्डिंग और दिखावटी स्वागत के बजाय कार्यकर्ता अपने घर और समर्थकों के घर पर बीजेपी का झंडा लगाएं। यह संदेश संगठन को सड़क पर होने वाले शक्ति प्रदर्शन की जगह जमीनी स्तर पर सक्रिय करने से जुड़ा माना गया।मेरठ में बुलडोजर से हुए स्वागत के बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन व्यापारियों और लोगों को बुलडोजर कार्रवाई की चिंता है, उनके बीच उसी मशीन से बीजेपी अध्यक्ष का स्वागत किए जाने का अलग संदेश जाता है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने भी इस स्वागत पर प्रतिक्रिया दी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुलडोजर पिछले कुछ वर्षों में एक प्रमुख राजनीतिक प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में अवैध निर्माण और कब्जों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई में बुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है। बीजेपी समर्थकों ने इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर पेश किया, जबकि विपक्ष ने इसी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।नितिन नबीन के पश्चिमी यूपी दौरे का मुख्य फोकस हालांकि संगठन रहा। मेरठ में उन्होंने युवा सम्मेलन और शक्ति केंद्र सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसके अलावा सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठकों में भी चर्चा की। उनके दौरे को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के संगठनात्मक अभियान की शुरुआत के तौर पर देखा गया।
नबीन ने पार्टी के मौजूदा जनप्रतिनिधियों और संगठन के नेताओं से फीडबैक लेने पर भी जोर दिया। इसके अलावा पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों से बातचीत के जरिए जमीनी स्थिति समझने की कोशिश की गई। पार्टी के भीतर पुराने मतभेदों को संगठनात्मक काम में बाधा न बनने देने का संदेश भी उनके दौरे से जुड़ा बताया गया है।सहारनपुर में नबीन ने सामाजिक संपर्क कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। उन्होंने रविदास मंदिर में दर्शन किए और एक दलित कार्यकर्ता के घर भोजन किया। इस दौरान सामाजिक संपर्क और अलग-अलग वर्गों के बीच संवाद पर जोर दिया गया।पश्चिमी यूपी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में नबीन के दौरे में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और स्थानीय फीडबैक लेने पर जोर दिखाई दिया। बुलडोजर से हुए शुरुआती स्वागत के बाद सादगी और संगठनात्मक सक्रियता का संदेश इस दौरे की चर्चित बातों में शामिल रहा। 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के आगामी कार्यक्रमों में यह रणनीति किस तरह आगे बढ़ती है, यह आने वाले महीनों में सामने आएगा।