शेयर बाजार में आईपीओ की बंपर लिस्टिंग देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए पिछले दो साल का प्रदर्शन बड़ा सबक दे रहा है। लिस्टिंग के दिन मल्टीबैगर रिटर्न देने वाले 10 आईपीओ अब अपने लिस्टिंग-डे हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। कुछ शेयरों में गिरावट इतनी ज्यादा रही कि वे अपने इश्यू प्राइस से भी नीचे पहुंच गए हैं।
Knews Desk– आईपीओ बाजार में इन दिनों निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। कई निवेशक बेहतर लिस्टिंग गेन की उम्मीद में आईपीओ में आवेदन करते हैं। लेकिन जिन्हें शेयर अलॉट नहीं हो पाते, उनमें से कुछ लोग लिस्टिंग के दिन बाजार भाव पर खरीदारी कर लेते हैं। पिछले दो साल के आंकड़े बताते हैं कि इस तरह की रणनीति कई मामलों में नुकसानदायक साबित हुई है।
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में लिस्टिंग के दिन मल्टीबैगर रिटर्न देने वाले 10 आईपीओ अपने लिस्टिंग-डे हाई से नीचे आ चुके हैं। जिन निवेशकों ने इन शेयरों को लिस्टिंग वाले दिन उनके उच्चतम स्तर के आसपास खरीदा था, उन्हें कई मामलों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कुछ शेयरों में यह गिरावट 75 फीसदी तक पहुंच गई।
लिस्टिंग के दिन किसी आईपीओ में 90 से 180 फीसदी तक की तेजी देखने के बाद निवेशकों का उसमें प्रवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि उस समय शेयर की कीमत उसके मूल इश्यू प्राइस के बजाय बाजार में बनी मांग और तेजी से तय हो रही होती है।
विभोर स्टील ट्यूब्स इसका बड़ा उदाहरण है। फरवरी 2024 में इसका इश्यू प्राइस 151 रुपये था और शेयर 421 रुपये पर लिस्ट हुआ था। लिस्टिंग के दिन इसने 442 रुपये का हाई बनाया। लेकिन 18 सितंबर 2026 तक शेयर की कीमत घटकर 112.35 रुपये रह गई। यानी लिस्टिंग-डे हाई के मुकाबले करीब 75 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। शेयर अब अपने आईपीओ इश्यू प्राइस से भी करीब 26 फीसदी नीचे है।
यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस के शेयर ने भी लिस्टिंग के बाद अपने हाई से बड़ी गिरावट देखी। 256.15 रुपये के लिस्टिंग-डे हाई से गिरकर शेयर 83.35 रुपये पर आ गया है। यह स्तर इसके इश्यू प्राइस से करीब 23 फीसदी कम है।
2024 के चर्चित आईपीओ में शामिल बजाज हाउसिंग फाइनेंस भी अपने लिस्टिंग-डे हाई से काफी नीचे आ चुका है। शेयर ने 164.99 रुपये का हाई बनाया था, लेकिन बाद में यह 85.49 रुपये तक गिर गया। यानी हाई से करीब 48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ममता मशीनरी, बीएलएस ई-सर्विसेज, प्रीमियर एनर्जीज, हैम्प्स बायो, जंगल कैंप्स इंडिया और लग्जरी टाइम जैसे शेयरों में भी लिस्टिंग के बाद अपने उच्चतम स्तर से गिरावट देखने को मिली है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आईपीओ में अलॉटमेंट पाने वाले सभी निवेशक नुकसान में हैं। इश्यू प्राइस के मुकाबले कई शेयर अभी भी मुनाफे में कारोबार कर रहे हैं। बीएलएस ई-सर्विसेज इश्यू प्राइस से 134 फीसदी, प्रीमियर एनर्जीज 101 फीसदी, ममता मशीनरी 66 फीसदी, भारत कोकिंग कोल 42 फीसदी और टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स 77 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। बजाज हाउसिंग फाइनेंस में अलॉटमेंट पाने वाले निवेशक भी इश्यू प्राइस के मुकाबले 22 फीसदी मुनाफे में हैं।
इससे साफ होता है कि सबसे ज्यादा दबाव उन निवेशकों पर पड़ा, जिन्होंने लिस्टिंग के दिन शेयर के ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। कई शेयरों में निवेशकों ने जिस कीमत पर एंट्री ली, उसके बाद शेयर उस स्तर तक दोबारा नहीं पहुंच सके।
इस ट्रेंड में केआरएन हीट एक्सचेंजर एक अलग उदाहरण है। कंपनी का इश्यू प्राइस 220 रुपये था और शेयर 470 रुपये पर लिस्ट हुआ था। लिस्टिंग के दिन इसने 513.40 रुपये का हाई बनाया। इसके बाद भी शेयर में तेजी जारी रही और अब यह 1447.85 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। यानी यह अपने इश्यू प्राइस से 558 फीसदी ऊपर है।
इस तरह पिछले दो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बंपर लिस्टिंग अपने आप में आगे भी शानदार रिटर्न की गारंटी नहीं होती। कुछ आईपीओ में लिस्टिंग के बाद लगातार तेजी देखने को मिली, जबकि कई शेयर अपने शुरुआती हाई से काफी नीचे चले गए। इसलिए सिर्फ लिस्टिंग के दिन की तेजी देखकर किसी शेयर में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।