उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच उधमसिंह नगर में हुए सेमीफाइनल कहे जाने वाले निकाय चुनाव ने सियासत गरमा दी है। हुआ यूँ कि, किच्छा नगर पालिका और सिरौली कलां नगर पंचायत में मंगलवार को मतदान शांतिपूर्ण हुआ,जिसकी मतगणना हाई कोर्ट के आदेशानुसार 5 अक्टूबर या उसके बाद ही तय समय अनुसार होगी लेकिन वोटिंग खत्म होते ही स्ट्रांग रूम की सुरक्षा पर बवाल मच गया और मतदान स्थल रणभूमि में बदल गया। दरअसल मतपेटियां स्ट्रांग रूम में रखी जा रही थीं, तभी आरोप लगा कि सामने तिरपाल लगा दिया गया है जिससे CCTV निगरानी बाधित हो रही है। कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने आपत्ति जताते हुए धरना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह भी समर्थकों के साथ धरने में शामिल हो गए, भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया। हंगामे की सूचना पर भाजपा प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला मौके पर पहुंचे तो मामला और बिगड़ गया। कांग्रेस व भाजपा नेताओं में पहले नोकझोंक और फिर हाथापाई हो गई। शुक्ला ने कांग्रेस प्रत्याशी पर मारपीट का आरोप लगाया। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने मौजूदा विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला दोनों को हिरासत में ले लिया। मामला यही ना थमा, देर रात 11 से 12 बजे के बीच कांग्रेस प्रत्याशी ने मतपेटियां बदलने और धांधली का आरोप लगा दिया, समर्थकों में आक्रोश फैल गया और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी पहुंच गए। कांग्रेस ने प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाया, जिसके बाद विवाद देहरादून तक पहुंच गया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल तक ने सत्ता पक्ष से लेकर चुनाव आयोग तक को घेरने का काम किया है, जिसके चलते आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए है।
प्रदेश के उधम सिंह नगर के किच्छा में निकाय चुनाव का क्लाइमैक्स वोट से न होकर लात घूंसों से हुआ। बीते रोज़ नगर निकाय चुनाव में मतदान के बाद जब मतपेटियां स्ट्रांग रूम में जा रही थीं, तो बाहर लगे एक तिरपाल ने पूरे विवाद की जड़ बनने का काम किया। जब कांग्रेस को लगा कि पर्दे के पीछे कोई झोल चल रहा है। इसी के चलते कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ तिरपाल हटाने के लिए धरने पर बैठ गए, और प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने समर्थकों के साथ मोर्चा संभाल लिया। फिर एंट्री हुई भाजपा प्रवक्ता राजेश शुक्ला की, बस फिर क्या था जुबानी जंग हाथापाई में बदल गई। हालात ऐसे बिगड़े कि पुलिस को वोटों की रखवाली छोड़ नेताओं को संभालना पड़ा। देर रात 11 बजे फिर सीन पलटा कांग्रेस ने मतपेटियां बदलने का आरोप लगा दिया। इस पूरे प्रकरण के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित अन्य कई कांग्रेस के बड़े चेहरों ने कई सवाल व आरोप लगाने का काम सत्ता पक्ष पर किया है। तो वही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने चुनाव आयोग को चिठ्ठी तक लिख डाली। विपक्ष आरोप लगा रहा है, उधर सत्ता पक्ष भी पलटवार करता दिख रहा है। जिसके चलते आपसी बहस तेज़ हो गई है।
कुल मिलाकर, किच्छा नगर निकाय चुनाव के वोटों की गिनती से ज्यादा स्ट्रांग रूम के बवाल को लेकर चर्चा में है। शांतिपूर्ण मतदान के बाद स्ट्रांग रूम के बाहर लगे तिरपाल ने जिस तरह की राजनीति को जन्म दिया, उसने इस छोटे से चुनाव को प्रदेश की बड़ी सियासी लड़ाई बना दिया है। एक तरफ कांग्रेस प्रशासन पर धांधली और मिलीभगत का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा कह रही है कि हार के डर से कांग्रेस हंगामा कर रही है। विधायक और पूर्व विधायक की हिरासत,आधी रात को मतपेटियां बदलने के आरोप और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयान ने साफ कर दिया है कि यह मामला अब सिर्फ किच्छा तक सीमित नहीं रहा। गणेश गोदियाल की चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी के बाद अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यही है कि जब एक नगर पालिका चुनाव में इतना घमासान है, तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रशासन निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित करेगा, अन्यथा क्या इस प्रकार का दृश्य आगे भी देखने को मिलेगा यह आने वाला समय ही बता पायेगा।