70 के दशक में लिखी गई एक गजल आज भी रहस्य और डर की कहानी से जुड़ी हुई है। इसे गाने वाले कई कलाकारों की बाद में मौत हो गई, जिसके चलते इसे ‘शापित गजल’ कहा जाने लगा। हालांकि, इन मौतों और गजल के बीच किसी अलौकिक संबंध का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
Knews Desk- इस गजल को इब्ने-इंशा ने लिखा था। पंजाब के फिल्लौर में जन्मे शेर मोहम्मद खान को दुनिया इब्ने-इंशा के नाम से जानती है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान वह पाकिस्तान चले गए थे। इब्ने-इंशा अपनी खास उर्दू भाषा, शायरी और व्यंग्य लेखन के लिए प्रसिद्ध रहे। उन्होंने कई यादगार गजलों के बोल लिखे।
इब्ने-इंशा की चर्चित रचनाओं में ‘कल चौदहवीं की रात थी’ भी शामिल है, जिसे जगजीत सिंह और गुलाम अली जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाज दी। लेकिन उनकी एक दूसरी गजल ‘इंशा जी उठो अब कूच करो, इस शहर में जी को लगाना क्या’ अपनी लोकप्रियता से ज्यादा उससे जुड़ी घटनाओं के कारण चर्चा में रही।
बताया जाता है कि इब्ने-इंशा ने यह गजल एक चिट्ठी में लिखी थी। इसके कुछ समय बाद उनका निधन हो गया। गजल के शब्दों में मोह-माया से दूरी और इस दुनिया से विदा होने की भावना दिखाई देती है। इसके बाद इस रचना को लेकर तरह-तरह की मान्यताएं सामने आने लगीं।
साल 1974 में पटियाला घराने के उस्ताद अमानत अली खान ने इस गजल को पाकिस्तान टीवी पर गाया था। बताया जाता है कि इसके टेलीकास्ट के कुछ महीनों बाद ही उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 52 साल थी।
इसके कई साल बाद उनके बेटे असद अमानत अली ने साल 2006 में एक कॉन्सर्ट के दौरान अपने पिता की गाई इस गजल को पेश किया। कुछ महीने बाद असद अमानत अली का भी अचानक निधन हो गया। पिता और बेटे के साथ हुई इन घटनाओं ने इस गजल से जुड़ी चर्चाओं को और बढ़ा दिया।
अमानत अली खान के बड़े बेटे अमजद भी इस गजल को गाया करते थे और उनका भी निधन हो चुका है। खबर के मुताबिक, इस गजल से जुड़े प्रोड्यूसर का भी निधन हो गया। इन घटनाओं के बाद परिवार में इस गजल को लेकर एक डर की भावना बन गई।
अमानत अली खान के बेटे शफकत अमानत अली ने कहा है कि वह अंधविश्वासी नहीं हैं। हालांकि, परिवार की ओर से उनसे इस गजल को नहीं गाने की गुजारिश की गई थी। यही वजह है कि इस गजल को लेकर आज भी संगीत जगत में एक रहस्यमयी किस्सा सुनने को मिलता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘शापित गजल’ की कहानी एक प्रचलित मान्यता है। कलाकारों की मौत और गजल के बीच किसी अलौकिक या वैज्ञानिक संबंध का कोई प्रमाण नहीं है।