Knews Desk – दिल्ली में चल रही एआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं। 33 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है। इनमें कई चर्चित नाम भी शामिल हैं। इन मामलों में रिकॉर्ड की जांच के दौरान डेटा का पुराने रिकॉर्ड से अपेक्षित तरीके से मिलान नहीं होने पर मतदाताओं को नोटिस भेजा जा रहा है।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का मतलब पुराने रिकॉर्ड से माता-पिता या दादा-दादी के नाम और अन्य डेटा को लिंक करते समय नाम या विवरण का मेल नहीं खाना है। इसके अलावा जाति के स्वरूप में अंतर और रिकॉर्ड की अन्य असंगतियां भी इसके दायरे में आती हैं।
एक अन्य वजह आयु का अंतर है। यदि मतदाता और उनके माता-पिता की उम्र के बीच अंतर असामान्य पाया जाता है, जैसे 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर, तो रिकॉर्ड में विसंगति के तौर पर इसे चिह्नित किया जा सकता है।
मैपिंग फेल होना भी एक वजह है। जब मौजूदा मतदाता डेटा का पिछले एसआईआर, आधार या अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड से सीधे तौर पर मिलान नहीं हो पाता या रिकॉर्ड अनमैप्ड रह जाता है, तो संबंधित मतदाता को नोटिस भेजा जा सकता है।
इस प्रक्रिया को लेकर मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों और एससीआरएफ जैसी संस्थाओं का तर्क है कि केवल स्पेलिंग या तार्किक विसंगतियों के आधार पर वैध मतदाताओं के सामने नाम हटने का संकट पैदा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावित लोगों को आपत्ति दर्ज कराने तथा जरूरी दस्तावेज जमा करने का पर्याप्त अवसर देने से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं।
अगर किसी मतदाता को बीएलओ या नोटिस के जरिए रिकॉर्ड में विसंगति की जानकारी मिलती है, तो वह अपने सही दस्तावेज, फॉर्म या घोषणा पत्र जमा कर सकता है। अगर नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाता है, तो फॉर्म 6 के जरिए दोबारा नाम शामिल कराने का विकल्प उपलब्ध रहता है। मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करने के अलावा चुनाव आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर भी जानकारी ले सकते हैं।
नोटिस पाने वालों में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, बीजेपी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, बीजेपी विधायक कैलाश गहलोत, पूर्व सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी और सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद सहित कई नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इन लोगों के रिकॉर्ड को ‘अनमैप्ड वोटर’ के तौर पर चिह्नित किए जाने की वजह से नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है। संबंधित व्यक्ति को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है।