दिल्ली में 20 जुलाई को CJP प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल लोचव ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में उन्हें पैलेट गन के छर्रे लगे. उनकी आंख समेत शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं. साहिल का दावा है कि इलाज और सर्जरी के बावजूद शरीर में कुछ छर्रे अब भी मौजूद हैं. उन्होंने FIR दर्ज कराने में भी परेशानी होने की बात कही है.
Knews Desk- दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP प्रदर्शन के दौरान घायल छात्र साहिल लोचव ने उस दिन की घटना और उसके बाद की परेशानियों को लेकर अपनी आपबीती साझा की है. साहिल के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पैलेट गन के छर्रे लगने से उनकी आंख और शरीर के दूसरे हिस्सों में गंभीर चोटें आईं. इलाज के दौरान उनकी सर्जरी भी हुई, लेकिन उनके अनुसार शरीर से सभी छर्रे नहीं निकाले जा सके.
साहिल ने बताया कि घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें सबसे पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल पहुंचाया. वहां से उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया. आंख के इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं होने की बात कहकर उन्हें आगे भेज दिया गया. इसके बाद वह AIIMS, RBS और फिर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे.
साहिल के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में उन्हें रेड जोन में शिफ्ट किया गया और 22 जुलाई की रात करीब एक बजे उनकी सर्जरी हुई.
आंख और सीने के पास छर्रे होने का दावा
साहिल का कहना है कि पैलेट के छर्रे बेहद छोटे हैं और उनकी आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा है. उन्होंने दावा किया कि चेस्ट और दिल के आसपास भी छर्रे मौजूद हैं. उनके मुताबिक, सर्जरी के दौरान शरीर से कोई पैलेट नहीं निकाला जा सका. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है.
इलाज के बाद साहिल ने FIR दर्ज कराने की कोशिश शुरू की. उनके मुताबिक, उन्होंने खुद शिकायत लिखी और अपनी मां तथा वकील के जरिए 14 अगस्त को थाने भेजी. उनका कहना है कि रात को जब वह वापस लौटे तो उन्हें बताया गया कि FIR दर्ज नहीं हुई है.
इसके बाद साहिल ने उसी रात ईमेल के जरिए शिकायत भेजी और 15 अगस्त को डाक से भी आवेदन किया. उनका दावा है कि इसके बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
राहुल गांधी की टीम ने की मदद
साहिल के मुताबिक, इसी दौरान अखबार में उनकी खबर प्रकाशित होने के बाद राहुल गांधी की टीम ने उनसे संपर्क किया. टीम ने पहले उनकी तबीयत के बारे में जानकारी ली और FIR दर्ज नहीं होने की बात पता चलने पर मदद का भरोसा दिया.
साहिल ने बताया कि 21 अगस्त को वह राहुल गांधी और उनकी टीम के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे थाने पहुंचने के बाद लगभग छह से सात घंटे में FIR दर्ज की गई.
हालांकि, FIR में कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं और क्या आरोप दर्ज किए गए हैं, इस बारे में साहिल ने कानूनी कारणों का हवाला देते हुए जानकारी साझा नहीं की.
साहिल की मां ज्योति ने भी बताया कि राहुल गांधी की टीम की ओर से उन्हें फोन आया था. उन्होंने उनके बेटे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और अगले दिन उन्हें बुलाया गया. साहिल का कहना है कि इलाज के दौरान टीम उनके संपर्क में रही और दूसरी सर्जरी के समय भी मदद की.
CJP के पदाधिकारियों से संपर्क नहीं होने का दावा
साहिल ने यह भी दावा किया कि CJP के किसी पदाधिकारी ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है. उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के कहने पर प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे. उनके मुताबिक, वह छात्रों के मुद्दों और कथित पेपर लीक के विरोध में अपनी इच्छा से प्रदर्शन में पहुंचे थे.
साहिल ने बताया कि उन्होंने 2025 में दिल्ली पुलिस की परीक्षा दी थी और भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुए थे.
साहिल के मुताबिक, उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है. वह BA ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई कर रहे थे और साथ में काम भी करते थे. घटना के बाद उन्हें अपना काम छोड़ना पड़ा. उन्होंने बताया कि उनके पिता दिव्यांग हैं और परिवार किराए के मकान में रहता है.
‘मेरी लड़ाई व्यवस्था और अन्याय के खिलाफ’
साहिल का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं. उनकी मांग है कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो.
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है. साहिल के मुताबिक, स्वास्थ्य ठीक होने के बाद भी वह छात्रों के अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में अपनी आवाज उठाते रहेंगे.