Knews Desk- जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की बरसी पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की एक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तस्वीर में महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर के झंडे के साथ तिरंगा पकड़े दिखाई दे रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज उल्टा नजर आ रहा है। इसे लेकर भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे जानबूझकर किया गया कृत्य मानने से इनकार करते हुए मानवीय भूल बताया है।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने की बरसी के मौके पर पीडीपी ने श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली की मांग कर रही है। प्रदर्शन में शामिल महबूबा मुफ्ती जमीन पर बैठी नजर आईं और उनके हाथों में दो झंडे थे।
इसी दौरान सामने आई तस्वीर में तिरंगा उल्टा दिखाई दिया। सामान्य तौर पर राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया रंग सबसे ऊपर, सफेद बीच में और हरा रंग नीचे होता है, जबकि वायरल तस्वीर में हरा रंग ऊपर दिखाई दे रहा था। तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।
उमर अब्दुल्ला ने किया महबूबा का बचाव
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रदेश का नेतृत्व कर चुका कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा पकड़ेगा।
उन्होंने संभावना जताई कि ऐसा अनजाने में हुआ होगा और इसे मानवीय भूल के तौर पर देखा जाना चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने इस मामले को बड़ा राजनीतिक विवाद बनाने से बचने की भी बात कही।
महबूबा मुफ्ती की तस्वीर वायरल होने के बाद भाजपा के नेताओं और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर आपत्ति जताई। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जोड़ते हुए पूर्व मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। हालांकि, सामने आई जानकारी के मुताबिक महबूबा मुफ्ती की ओर से इस विवाद पर तत्काल कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था।
2020 का बयान भी फिर चर्चा में
मौजूदा विवाद के बीच महबूबा मुफ्ती का अक्टूबर 2020 में दिया गया एक पुराना बयान भी दोबारा चर्चा में आ गया है। उस समय उन्होंने जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन अलग झंडे और विशेष दर्जे की बहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि जब तक जम्मू-कश्मीर का झंडा वापस नहीं मिलता, तब तक वह किसी दूसरे झंडे को हाथ में नहीं उठाएंगी।
उनके इस बयान पर उस समय भी बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था। भाजपा ने महबूबा मुफ्ती के बयान की आलोचना करते हुए इसे तिरंगे के सम्मान से जोड़ा था। वहीं पीडीपी का कहना था कि महबूबा के बयान को पूरे संदर्भ में नहीं देखा जा रहा है।
अनुच्छेद 370 को लेकर फिर तेज हुई सियासत
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया गया था।
सातवीं बरसी के मौके पर जम्मू-कश्मीर में इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से विशेष दर्जे की बहाली की मांग उठाई जा रही है। इसी बीच महबूबा मुफ्ती की उल्टे तिरंगे वाली तस्वीर ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।