Knews Desk– अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक समझौते के मसौदे पर सहमति बन गई है। ट्रंप के अनुसार, यदि यह डील अंतिम रूप ले लेती है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होगा और दुनिया पर मंडरा रहा युद्ध का खतरा भी काफी हद तक टल जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के कारण अमेरिका ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने का फैसला किया है।ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की पूरी तैयारी कर चुका था। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई साबित हो सकती थी। हालांकि, बातचीत में हुई प्रगति और समझौते की शर्तों पर सहमति बनने के बाद उन्होंने सैन्य विकल्प के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।
राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, पिछले करीब पांच महीनों से मध्य पूर्व के कई सहयोगी देशों की मौजूदगी में ईरान के साथ तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने को लेकर बातचीत चल रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसे समझौते का मसौदा तैयार हुआ, जिस पर दोनों पक्षों ने सिद्धांततः सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह ईरान पर किसी नए हमले का आदेश नहीं देंगे और वार्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।इस प्रस्तावित समझौते का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बताया जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस बात पर राजी हो गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा खुला रहेगा और वहां से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार बाधित नहीं होगा। गौरतलब है कि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यदि यह मार्ग खुला रहता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि इस समझौते के तहत ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इससे परमाणु युद्ध का खतरा काफी हद तक समाप्त हो जाएगा और दुनिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनेगी। उन्होंने इसे वैश्विक शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी इस संबंध में पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका पूरी सैन्य क्षमता के साथ कार्रवाई करने के लिए तैयार था, लेकिन ईरान और मध्य पूर्व के अन्य देशों ने बातचीत जारी रखने और सैन्य कार्रवाई टालने का अनुरोध किया। ट्रंप के अनुसार, समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला लिया।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर अभी तक ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस प्रस्तावित समझौते के अंतिम स्वरूप और उसके प्रभाव को लेकर नजरें टिकी हुई हैं। यदि यह समझौता औपचारिक रूप से लागू होता है, तो यह न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में नया अध्याय खोल सकता है, बल्कि मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।