KNEWS DESK- उत्तराखंड के ऋषिकेश में गंगा नदी पर बना प्रसिद्ध राम झूला अब आम लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। करीब 40 साल पुराने इस सस्पेंशन ब्रिज को व्यापक मरम्मत, अपग्रेडेशन और सुदृढ़ीकरण के लिए शनिवार शाम से दोनों ओर से बंद कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और काम पूरा होने के बाद दिसंबर 2026 तक पुल को दोबारा जनता के लिए खोलने की योजना है।
राम झूला ऋषिकेश के सबसे प्रमुख पैदल पुलों में गिना जाता है। यह करीब 220 मीटर लंबा और लगभग दो मीटर चौड़ा है तथा पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल जिलों को जोड़ता है। हर दिन हजारों स्थानीय लोग, श्रद्धालु और पर्यटक इस पुल का इस्तेमाल करते हैं। सावन और चारधाम यात्रा जैसे धार्मिक अवसरों पर यहां आवाजाही कई गुना बढ़ जाती है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के मुताबिक, समय के साथ पुल की संरचना में कई तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं। सस्पेंशन केबल के कुछ हिस्सों में क्षति, नींव में कमजोरी और पुल में दरारें पाए जाने के बाद विशेषज्ञों ने व्यापक मरम्मत की सिफारिश की थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुल को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है, ताकि मरम्मत का काम बिना किसी जोखिम के पूरा किया जा सके।
यह पहली बार नहीं है जब राम झूला को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया हो। वर्ष 2019 और 2023 में मानसून के दौरान भारी बारिश के बाद भी एहतियात के तौर पर पुल को कुछ समय के लिए बंद किया गया था। हालांकि इस बार मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य बड़े स्तर पर किया जाएगा, इसलिए पुल कई महीनों तक बंद रहेगा। PWD के नरेंद्रनगर डिवीजन के अधिशासी अभियंता प्रवीण कर्णवाल ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य केवल मरम्मत करना नहीं, बल्कि पुल की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विभाग का लक्ष्य दिसंबर तक सभी कार्य पूरे कर पुल को दोबारा आम लोगों के लिए खोलना है।
हालांकि इस फैसले पर स्थानीय व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मरम्मत का काम कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद शुरू किया जाना चाहिए था। सावन के दौरान लाखों कांवड़िए, श्रद्धालु और पर्यटक ऋषिकेश पहुंचते हैं तथा नीलकंठ महादेव मंदिर जाने के लिए बड़ी संख्या में राम झूला का उपयोग करते हैं। ऐसे समय में पुल बंद होने से यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ेंगे। व्यापारियों का यह भी कहना है कि पुल बंद रहने से आसपास के बाजारों, होटल, दुकानों और छोटे कारोबारियों पर आर्थिक असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही इसी पुल से होती है, जिससे स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलता है।
साल 1986 में निर्मित राम झूला ऋषिकेश की पहचान और प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल है। गंगा के दोनों किनारों को जोड़ने वाला यह पुल धार्मिक, पर्यटन और स्थानीय आवागमन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मरम्मत का काम तय समय पर पूरा हो और दिसंबर में यह ऐतिहासिक सस्पेंशन ब्रिज फिर से लोगों के लिए खोल दिया जाए।