राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: जांच बैंक खातों तक पहुंची, 7 बैंकों से 5 साल का रिकॉर्ड तलब

Knews Desk- अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब और गहराती जा रही है। पुलिस ने इस केस में वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी खंगालनी शुरू कर दी है और जांच अब बैंक खातों तथा ऑडिट प्रक्रिया तक पहुंच गई है।

अयोध्या पुलिस ने सात प्रमुख बैंकों से पिछले पांच वर्षों का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। इन बैंकों में वे खाते भी शामिल हैं जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े हैं, साथ ही वे खाते भी जिनका संबंध चढ़ावा चोरी के आरोप में पकड़े गए आठ आरोपियों से बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों ने बैंकों से खातों का स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज, और सभी प्रकार के लेन-देन का पूरा विवरण मांगा है। इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय ट्रेल (Financial Trail) का पता लगाना है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि मंदिर दान प्रबंधन के दौरान किसी भी खाते में असामान्य जमा या निकासी तो नहीं हुई, या फिर किसी संदिग्ध खाते में धन का ट्रांसफर किया गया हो।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या दान राशि के संचालन में किसी प्रकार की अनियमितता या हेराफेरी की गई थी। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनके बैंक खातों में अचानक बड़े लेन-देन या संदिग्ध ट्रांजैक्शन तो नहीं हुए। जांच के दौरान पुलिस की एक टीम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या धाम शाखा भी पहुंची, जहां ट्रस्ट का दान से संबंधित मुख्य खाता संचालित होता है। वहां से पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, जमा पर्चियां और ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट की विस्तृत जांच की।

इसके अलावा, पुलिस ने छह अन्य बैंकों की शाखाओं का भी दौरा किया है और वहां से संबंधित सभी रिकॉर्ड एकत्र किए जा रहे हैं। इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर पूरे मामले की वित्तीय परतें खोली जा रही हैं अधिकारियों का कहना है कि यह जांच केवल आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दान प्रबंधन सिस्टम की पारदर्शिता को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि मंदिर में आने वाले दान का उपयोग और उसका रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी हो।

फिलहाल, पुलिस और वित्तीय जांच टीमें सभी बैंक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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