KNEWS DESK – Supreme Court of India ने वृंदावन स्थित Banke Bihari Temple में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर “कुछ अलग हटकर सोचने” की जरूरत है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाएं बेहतर की जा सकें।
चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ ने मंदिर और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार करने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि मंदिर तक पहुंचने वाली संकरी गलियां और सीमित जगह भविष्य में बड़े हादसों की वजह बन सकती हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया कि इलाके में सड़क चौड़ीकरण, श्रद्धालुओं के लिए आश्रय स्थल, पीने के पानी की व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय, आपातकालीन निकास और बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किए जाने चाहिए। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं भी सुनिश्चित करने की बात कही गई।
Supreme Court of India ने उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश करें।
सुनवाई के दौरान मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Shyam Divan ने कहा कि मंदिर की कई धार्मिक परंपराएं सदियों पुरानी हैं और प्रशासनिक सुविधा के नाम पर उनमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंदिर परिसर में तेज रोशनी वाली हैलोजन लाइट्स लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि बांके बिहारी जी को जीवित देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए ऐसी व्यवस्थाएं भक्तों की भावनाओं के खिलाफ हैं।
इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल Nataraj ने कोर्ट को बताया कि मंदिर प्रबंधन समिति में चार गोस्वामियों की नियुक्ति निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत की गई है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस Surya Kant ने संत Swami Haridas और मुगल सम्राट Akbar से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि अकबर, तानसेन के साथ भेष बदलकर संत हरिदास का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। जब अकबर ने संत हरिदास से कोई वरदान मांगने को कहा, तो उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं मांगा, बल्कि मंदिर के लिए जमीन देने का अनुरोध किया था।