मद्रास हाईकोर्ट ने रद्द किया तमिलनाडु सरकार का फैसला, करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी

Knews Desk- मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार को बड़ा झटका देते हुए करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां संविधान में समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप नहीं हैं।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केवल किसी विशेष घटना के आधार पर सरकारी नौकरी देना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है। न्यायालय का मानना है कि इससे भविष्य में अन्य मामलों में भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं, जिससे सरकारी नियुक्तियों की निष्पक्ष प्रक्रिया प्रभावित होगी।

सरकार ने जुलाई में सौंपे थे नियुक्ति पत्र

इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री विजय ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों में से 32 मृतकों के कानूनी वारिसों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए थे। सरकार का कहना था कि यह कदम प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हालांकि, विपक्षी दल AIADMK ने इस फैसले का विरोध किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने आरोप लगाया था कि इस तरह की नियुक्तियां उन लाखों युवाओं के साथ अन्याय हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा।

क्या था करूर भगदड़ का मामला?

पिछले वर्ष करूर में विजय की पार्टी टीवीके (TVK) की रैली के दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें बच्चों सहित 41 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पुलिस ने दावा किया था कि रैली स्थल पर भीड़ क्षमता से अधिक हो गई थी। साथ ही पानी, भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी हादसे की एक बड़ी वजह बताई गई।

दूसरी ओर, टीवीके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए घटना के लिए पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया था। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया था कि पूरे घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक साजिश थी।

मामले की जांच सीबीआई के पास

करूर भगदड़ का मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अक्टूबर 2025 में शीर्ष अदालत ने जांच को विशेष जांच दल (SIT) से हटाकर सीबीआई को सौंप दिया था। अदालत ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताते हुए भीड़ प्रबंधन, आयोजन की व्यवस्था, मुख्यमंत्री विजय के कार्यक्रम में देरी और प्रशासन व आयोजकों के बीच समन्वय जैसे सभी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए थे। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है।

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