शिव शंकर सविता- देश की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की घोषणा कर सियासी हलचल तेज कर दी है। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल के साथ मंच साझा करते हुए कहा कि उन्होंने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “हमने तय किया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए भाजपा में विलय करेंगे।
राघव के जाने से आप को लगा बड़ा झटका
राघव चड्ढा के इस ऐलान को आप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी पहले ही कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक का भी भाजपा में शामिल होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देता है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच दूरी उस समय से बढ़नी शुरू हुई, जब केजरीवाल जेल में थे और उसी दौरान राघव चड्ढा विदेश में थे। इस दौरान उनकी निजी तस्वीरों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसके अलावा, लोकसभा चुनाव के दौरान भी राघव चड्ढा की सीमित भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। उन्हें पंजाब की राजनीति से कुछ हद तक दूर रखा गया, जिससे यह संकेत मिलने लगे थे कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पिछले दिनों ही हटाया गया था उपनेता पद से
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे, जो इस बड़े फैसले की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा था। वहीं, विपक्षी दल इस घटनाक्रम को आप के अंदरूनी मतभेद और नेतृत्व संकट का परिणाम बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह पार्टी के भीतर असंतोष का स्पष्ट संकेत है। हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राघव चड्ढा का यह कदम निश्चित तौर पर पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।