डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बलिया से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर पेट्रोल पम्प पर तेल न मिलने की वजह से एक मरीज की जान चली गई। घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और आपात सेवाओं की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के अनुसार, बैरिया थाना क्षेत्र के पांडेपुर जगदेवा गांव निवासी 50 वर्षीय छठठू शर्मा को बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे अचानक सीने में तेज दर्द उठा। स्थिति गंभीर होने पर गांव के प्रधान सत्येंद्र यादव तुरंत उन्हें एक निजी एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाने के लिए निकले। लेकिन रास्ते में एक बड़ी बाधा सामने आ गई क्योंकि एम्बुलेंस में तेल खत्म हो गया।
पेट्रोल पंप पर बताई समस्या, पर नहीं दिया तेल
बताया जा रहा है कि एम्बुलेंस को टेंगरही मोड़ के पास स्थित एक पेट्रोल पम्प पर ले जाया गया, जहां चालक और साथ मौजूद लोगों ने तत्काल तेल देने की मांग की। उनका कहना था कि एम्बुलेंस में गंभीर मरीज है और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है। बावजूद इसके, पेट्रोल पम्प कर्मियों ने तेल देने से इनकार कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधान ने उप जिलाधिकारी बैरिया से भी संपर्क किया, लेकिन इसके बावजूद भी एम्बुलेंस को तेल नहीं मिला। समय तेजी से निकलता जा रहा था और मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। अंततः मजबूर होकर साथ मौजूद लोगों ने कुछ बाइकों से पेट्रोल निकालकर एम्बुलेंस में डाला और किसी तरह मरीज को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने छठठू शर्मा को मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया और लोगों में आक्रोश फैल गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में यह पुष्टि हुई है कि एम्बुलेंस पेट्रोल पम्प पर पहुंची थी और उसे तेल नहीं दिया गया। पेट्रोल पम्प संचालकों ने भी इस बात को स्वीकार किया है। हालांकि, पम्प संचालकों ने सफाई देते हुए कहा कि उनके पास तेल का स्टॉक कम था, लेकिन जब प्रशासन ने जांच की तो पाया गया कि पम्प पर करीब 8500 लीटर पेट्रोल और 4500 लीटर से अधिक डीजल उपलब्ध था। इससे साफ हो गया कि तेल न देने का कारण स्टॉक की कमी नहीं था।