डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में जहां एक ओर मतदान जारी है, वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों से हिंसा और तनाव की खबरें सामने आने लगी हैं। गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हो रही है, लेकिन मुर्शिदाबाद और सिलीगुड़ी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हालात ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं और करीब 3 करोड़ 60 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। राज्यभर में 44 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 7,384 को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। कड़ी सुरक्षा के बावजूद कुछ जगहों पर तनावपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं।
मुर्शिदाबाद में बम हमलों का इतिहास रहा है पुराना
मुर्शिदाबाद में बम फेंके जाने की घटना ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने चिंता जताते हुए कहा कि इस क्षेत्र का बम हमलों का पुराना इतिहास रहा है और चुनाव आयोग को यहां और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी घटनाएं निष्पक्ष मतदान के लिए गंभीर चुनौती हैं। वहीं, आसनसोल दक्षिण से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल ने भी मुर्शिदाबाद के नौदा में कच्चा बम फेंके जाने की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाओं से मतदाताओं को डराने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
सिलीगुड़ी के बूथ में भिड़े बीजेपी-टीएमसी कार्यकर्ता
इसी बीच, सिलीगुड़ी में भी तनाव देखने को मिला, जहां जगदीश चंद्र विद्यापीठ के एक बूथ पर तृणमूल और भाजपा समर्थकों के बीच कहासुनी हो गई। हालांकि स्थिति को समय रहते संभाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। मुर्शिदाबाद में एक और घटना में आम जनता उन्नयन पार्टी (AUJP) के संस्थापक हुमायूं कबीर और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। बताया जा रहा है कि हुमायूं कबीर उस इलाके का दौरा कर रहे थे, जहां एक दिन पहले बम फेंके जाने की घटना हुई थी। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। राज्य में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है, और कई सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। यही वजह है कि चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर रही हैं। चुनाव आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसमें केंद्रीय बलों की तैनाती, वेबकास्टिंग और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी शामिल है। इसके बावजूद छिटपुट घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं।