KNEWS DESK – मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। United States और Israel की ओर से Iran के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी गई है, जबकि ईरान भी लगातार जवाबी हमले कर रहा है। इस बढ़ते टकराव के बीच अमेरिका की ओर से बड़ा संकेत मिला है कि आने वाली रात में ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा सकता है। इस चेतावनी के बाद पूरे विश्व की नजर इस संघर्ष पर टिक गई है।
सबसे बड़े हमले की तैयारी का संकेत
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान और तेज किया जा सकता है। उन्होंने फॉक्स बिजनेस के ‘कुडलो’ शो में कहा कि अमेरिका जल्द ही बड़ा बमबारी अभियान शुरू कर सकता है।
उनके अनुसार इस अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल निर्माण से जुड़े ठिकाने होंगे। बेसेंट ने यह भी कहा कि Pete Hegseth और सैन्य अधिकारियों की ओर से भी इस अभियान को लेकर स्पष्ट संकेत दिए जा चुके हैं। अमेरिका का दावा है कि लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से ईरान की रक्षा क्षमताएं तेजी से कमजोर हो रही हैं।
रूस के तेल को लेकर भी अहम फैसला
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वॉशिंगटन ने भारत को समुद्र में फंसे Russia के कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट देने का फैसला किया है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनी रहेगी और कीमतों में अस्थिरता को रोका जा सकेगा। स्कॉट बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में रूसी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में और ढील दी जा सकती है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल समुद्र में फंसा हुआ है।
जंग में बढ़ता जा रहा है नुकसान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी इस संघर्ष में अब तक 1300 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है। इस दौरान कई मेडिकल सेंटरों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
ईरान के कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों पक्षों को हुआ नुकसान
अमेरिका का दावा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई में ईरान के करीब 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए गए हैं। हालांकि इस संघर्ष में अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना के 6 सैनिकों की मौत हुई है और उसके लगभग 20 सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है।