Knews Desk– नीट-यूजी परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुभवी नेता प्रह्लाद वेंकटेश जोशी पर भरोसा जताया है। उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। पहले से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण जैसे अहम मंत्रालय संभाल रहे जोशी अब शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े सुधारों की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। ऐसे में उनका राजनीतिक सफर एक बार फिर चर्चा में है।
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (तत्कालीन बीजापुर) में हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई हुबली में हुई और उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, धारवाड़ से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले वे एक उद्योगपति के रूप में सक्रिय थे। उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर ‘विभव केमिकल्स’ नाम से एक छोटा उद्योग शुरू किया और हुबली स्थित कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से भी जुड़े रहे।राजनीति में उनकी सक्रिय पहचान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता के रूप में बनी। 1992 से 1994 के बीच हुबली के विवादित ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने को लेकर चले आंदोलन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने उन्हें कर्नाटक की राजनीति में पहचान दिलाई। समर्थकों ने इसे राष्ट्रवाद का प्रतीक बताया, जबकि विरोधियों ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देखा। इसी दौर में उन्होंने ‘सेव कश्मीर मूवमेंट’ का नेतृत्व भी किया, जिससे संगठन में उनकी पकड़ और मजबूत हुई।
संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव में मौका दिया। वर्ष 2004 में उन्होंने पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत हासिल करते हुए वह पांच बार सांसद बने। संसद के भीतर और संगठन में उनकी सक्रियता ने उन्हें भाजपा नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा बना दिया।प्रह्लाद जोशी ने पार्टी संगठन में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वह भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रदेश अध्यक्ष रहे और संसदीय रणनीति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2019 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने में अहम भूमिका निभाई।
2024 में तीसरी बार बनी मोदी सरकार में उन्हें नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ-साथ उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंपा गया है। इस तरह वह अब तक केंद्र सरकार में छह प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।प्रह्लाद जोशी को भाजपा और मोदी सरकार का ‘ट्रबलशूटर’ इसलिए भी माना जाता है क्योंकि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्हें अक्सर अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी जाती रही हैं। अब शिक्षा मंत्रालय की कमान ऐसे समय में उनके हाथों में आई है, जब परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और छात्रों के भरोसे को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में उनकी प्रशासनिक क्षमता और संगठनात्मक अनुभव की एक बार फिर बड़ी परीक्षा होगी।